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UP के इस गांव के लोग राखी से थर-थर कांपते हैं, 300 साल से भाइयों के हाथ में नहीं बंधी राखी, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

Raksha Bandhan 2024: देश भर में 19 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया है। इस बीच उत्तर प्रदेश के संभल जिले का बनीपुर गांव हमेशा सुर्खियों में रहता है। इस गांव के भाइयों के हाथ में 300 साल से राखी नहीं बांधी गई है। अब आगे कब राखी बांधी जाएगी, इस बारे में अभी किसी कुछ पता नहीं है। लेकिन राखी बांधने की परंपरा क्यों बंद हुई, सुनकर हैरान रह जाएंगे

Jitendra Singhअपडेटेड Aug 20, 2024 पर 3:51 PM
UP के इस गांव के लोग राखी से थर-थर कांपते हैं, 300 साल से भाइयों के हाथ में नहीं बंधी राखी, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन पर बहन ने पूरा गांव ही मांग लिया। ऐसे में परिवार के मुखिया भी मना नहीं कर सके और घर खाली करके चले गए।

भाई -बहन के प्यार का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन पूरे देश भर में 19 अगस्त को मनाया गया। लेकिन उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक ऐसा गांव है। जहां रक्षाबंधन का त्योहार पिछले 300 साल से नहीं मनाया गया। जिले के बेनीपुर गांव के भाइयों की कलाई सैकड़ों साल से बिना राखी के सूनी है। यहां रक्षाबंधन नहीं मनाने की परंपरा करीब 300 सालों से चली आ रही है। इस गांव के लोगों को रक्षाबंधन का नाम सुनते डर लगने लगता है। शायद इसी डर की वजह से लोग राखी के नाम से कोसों दूर भागते हैं। दिलचस्प बात ये है कि बहनों को छोड़कर इस गांव की बहुएं भी अपने मायके राखी बांधने नहीं जाती हैं।

गांव के भाइयों को डर लगता है कि कहीं राखी बांधकर बहनें उनकी संपत्ति न मांग लें। पूर्वजों के जमाने से चली आ रही यह परंपरा गांव में आज भी कायम है। सभी लोग इसका बखूबी पालन भी करते हैं।

राखी देखकर दूर भागते हैं गांव के लोग

संभल से आदमपुर मार्ग पर लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर बेनीपुर गांव है। वक्त के साथ यह गांव भी आधुनिकता के ढांचे में ढल रहा है। इसके बावजूद रक्षाबंधन न मनाने की 300 साल पुरानी परंपरा अभी भी कायम है। गांव के लोग राखी देखकर दूर भागते हैं। गांव के बुजुर्ग लोगों का कहना है कि एक राखी के कारण उनके पूर्वज को अपनी पूरी संपत्ति गंवानी पड़ी थी। गांव के लोगों के मुताबिक, उनके पूर्वज पहले यूपी के अलीगढ़ जिले के अतरौली थाना क्षेत्र के गांव सेमरी में रहते थे। गांव में यादव और ठाकुर समाज के परिवार बसे हुए थे। दोनों परिवारों में अपार प्रेम था। यादव परिवार की लड़कियां ठाकुर परिवार के लड़कों और ठाकुर परिवार की लड़कियां यादव परिवार के लड़कों को रक्षाबंधन के पर्व पर राखी बांधा करती थीं।

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