Ram Navami: रामनवमी के शुभ मुहूर्त पर इन 16 चरणों में विधि-विधान से करें पूजा, पूरी होगी हर मुराद

Ram Navami: सबसे महत्वपूर्ण भारतीय त्योहारों में से एक राम नवमी मानव रूप में विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म को दर्शाने के लिए हर साल मनाया जाता है। यह शुक्ल पक्ष नवमी को पड़ता है। यानी, चैत्र महीने के नौवें दिन मनाया जाता है

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 12:57 AM
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Ram Navami: सबसे महत्वपूर्ण भारतीय त्योहारों में से एक राम नवमी मानव रूप में विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म को दर्शाने के लिए हर साल मनाया जाता है।

Ram Navami: सबसे महत्वपूर्ण भारतीय त्योहारों में से एक राम नवमी मानव रूप में विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म को दर्शाने के लिए हर साल मनाया जाता है। यह शुक्ल पक्ष नवमी को पड़ता है। यानी, चैत्र महीने के नौवें दिन मनाया जाता है। ये चैत्र नवरात्रि के समाप्त होने का भी प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र नवरात्रि मार्च या अप्रैल में होते हैं। इस साल 2024 में रामनवमी बुधवार 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल (दोपहर) के दौरान हुआ था, जिसे राम नवमी पूजा अनुष्ठान करने के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।

राम नवमी 2024: तारीख

द्रिक पंचांग के अनुसार राम नवमी 17 अप्रैल बुधवार को है।


राम नवमी 2024: समय और शुभ मुहूर्त

- राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 9:57 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक (2 घंटे 33 मिनट)

- राम नवमी मध्याह्न मुहुर्त: सुबह 11:14 बजे

- राम नवमी तिथि 16 अप्रैल को दोपहर 1:23 बजे से शुरू होगी।

- राम नवमी तिथि 17 अप्रैल को दोपहर 3:14 बजे समाप्त होगी

राम नवमी: पूजा विधि

राम नवमी पूजा विधि में 16 प्रमुख स्टेप

1. भक्तों को भगवान राम की मूर्ति के सामने मेडिटेशन से शुरुआत करनी चाहिए।

2. मेडिटेशन के बाद मूर्ति के सामने आवाहन मुद्रा रखकर मंत्र का जाप करना चाहिए।

3. इसके बाद मंत्र जारी रखते हुए भगवान राम को आसन देने के बाद फूल चढ़ाए जाते हैं।

4. भगवान राम को आसन देने के बाद उनके पैरों को जल से धोया जाता है।

5. इसके बाद अभिषेक के लिए जल अर्पित करें।

6. अर्घ्य अर्पित करने के बाद भक्त भगवान राम को पीने के लिए जल चढ़ाएं।

7. मंत्र का जाप करते हुए आगे शहद और दूध अर्पित करें।

8. इसके बाद स्नान के लिए जल अर्पित करें।

9. भगवान राम को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और चीनी का मिश्रण) से स्नान कराएं।

10. अब भगवान को नए वस्त्र पहनाएं।

11. कपड़े अर्पण के बाद भगवान राम के लिए छोटा यज्ञ करें।

12. इत्र अर्पित करें।

13. भगवान राम की प्रार्थना करते हुए फूल चढ़ाएं।

14. इसके बाद गंध, अक्षत और पुष्प लेकर उन देवताओं की पूजा करें, जो श्रीराम के अंग हैं।

15. उसके बाद धूप (अगरबत्ती), दीप (दीपक), नैवेद्य (मिठाई), फलम (फल), तांबूलम (सुपारी वाला पान) और दक्षिणा (उपहार) चढ़ाएं।

16. अंत में आरती, पुष्पांजलि, दक्षिणा करके और क्षमा मांग कर पूजा विधि समाप्त करें। भक्त, पूजा अनुष्ठानों और प्रसाद के माध्यम से अपने और अपने परिवार के लिए आशीर्वाद मांगते हुए, दिन के दौरान उपवास भी रखते हैं।

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