Semiconductor Subsidy Scheme: सरकार सेमीकंडक्टर सब्सिडी स्कीम के चलते भारत में अगले 18 से 24 महीने में दो फैब्स और पैकेजिंग यूनिट्स शुरू होने की उम्मीद कर रही है। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) ने यह बात कही।
Semiconductor Subsidy Scheme: सरकार सेमीकंडक्टर सब्सिडी स्कीम के चलते भारत में अगले 18 से 24 महीने में दो फैब्स और पैकेजिंग यूनिट्स शुरू होने की उम्मीद कर रही है। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) ने यह बात कही।
चंद्रशेखर ने 26 अक्टूबर को दिल्ली में हुई एक टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारे पास न सिर्फ सेमीकंडक्टर रिसर्च, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से एक ब्लूप्रिंट है, बल्कि हमारे पास इसे उच्च शिक्षा में शामिल करने और एक टेलेंट विकसित करने की रणनीति भी है। हम ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम के लिए टैलेंट का हब होंगे।”
चिपमेकर्स को लुभाने के लिए राज्यों में कड़ी प्रतिस्पर्धा
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने राज्यों के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रियों से टेक्नोलॉजी के उभरते क्षेत्रों में मौजूद अवसरों पर ध्यान देने के लिए कहा है।
उन्होंने कहा कि चिपमेकर्स को लुभाने के लिए राज्यों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। इसी तरह के एक मामले में गुजरात ने केंद्र की इंसेंटिव स्कीम पर टॉप अप सब्सिडी देकर एक डील हासिल कर ली थी।
सेमीकंडक्टर स्कीम में किया बदलाव
पिछले महीने, सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिसप्ले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए लागू अपनी 76,000 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम में बदलाव दिया गया। इसमें भारत की आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से इंटेल जैसी ग्लोबल कपनियों को देश में प्रोडक्शन बेस स्थापित करने के लिए सभी कैटेगरीज की फैक्ट्रीज में प्रोजेक्ट कॉस्ट का 50 फीसदी ऑफर दिया गया है।
पीएलआई स्कीम का किया था ऐलान
बीते साल दिसंबर में भारत में सेमीकंडक्टर और डिसप्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के उद्देश्य से विभिन्न कैटेगरीज में वित्तीय समर्थन की पेशकश के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड स्कीम यानी PLI का ऐलान किया था। इसमें 30-50 फीसदी समर्थन दिया जाना है।
अब इसे एक समान बना दिया गया है यानी न सिर्फ अत्याधुनिक कम्प्यूटिंग चिप्स, बल्कि पावर, टेलीकॉम और ऑटोमोटिव सेक्टर्स में इस्तेमाल होने वाले चिप्स के लिए सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना के उद्देश्य से सभी टेक्नोलॉजी नोड्स पर प्रोजेक्ट कॉस्ट का 50 फीसदी तक वित्तपोषण करेगी।
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