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कोलकाता के सोनागाछी में सेक्स वर्कर्स के बीच बह रही बदलाव की बयार, जानिए कैसे गढ़ रहीं अपने बच्चों का भविष्य

एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट एरिया में शामिल सोनागाछी में करीब 16,000 सेक्स वर्कर्स रहती हैं। हर साल करीब 800-1,500 महिलाएं अपना पेट भरने के लिए सोनागाछी आती हैं। ये बंगाल, झारखंड, नेपाल, बांग्लादेश और दूसरी जगहों से आती हैं

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Oct 15, 2022 पर 5:22 PM
कोलकाता के सोनागाछी में सेक्स वर्कर्स के बीच बह रही बदलाव की बयार, जानिए कैसे गढ़ रहीं अपने बच्चों का भविष्य
यहां की महिलाएं अपने बच्चों का फ्यूचर बदलना चाहती हैं। वे उन्हें पढ़ाना चाहती हैं ताकि उन्हें कोलकाता या दूसरी जगह सम्मान की नौकरी मिल सके।

कोलकाता के सोनागाछी (Sonagachi) में बदलाव की बयार बह रही है। एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट एरिया (one of the biggest red light area of asia) में शामिल सोनागाछी में करीब 16,000 सेक्स वर्कर्स (sex workers) रहती हैं। यहां की महिलाएं अपने बच्चों का फ्यूचर बदलना चाहती हैं। वे उन्हें पढ़ाना चाहती हैं ताकि उन्हें कोलकाता या दूसरी जगह सम्मान की नौकरी मिल सके। पिछले कई सालों से यहां की महिलाओं की तरह उनके बच्चों की दुनिया में भी अंधेरा रहा है।

हर साल 800-1500 महिलाएं सोनागाछी आती हैं

हर साल करीब 800-1,500 महिलाएं अपना पेट भरने के लिए सोनागाछी आती हैं। ये बंगाल, झारखंड, नेपाल, बांग्लादेश और दूसरी जगहों से आती हैं। बंगाली भाषा में सोनागाछी का मतलब 'सोने का पेड़' होता है। एक समय यह इलाका डाकुओं का गढ़ होता था। वे चितपुर रोड की दुकानों से कपड़े और सोने के आभूषण खरीदकर लौट रहे लोगों को लूट लेते थे।

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