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साइलेंट किलर है यह थाई डिश, केवल एक बाइट भी बन सकती है कैंसर की वजह

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एक बार खाने के बाद, ये कीड़े पित्त नलिकाओं में वर्षों तक बिना पता लगे रह सकते हैं, जिससे सूजन हो सकती है। यह समय के साथ गंभीर कैंसर को ट्रिगर कर सकती है। थाइलैंड के इसान के कई ग्रामीण यह सुनकर हैरान रह जाते हैं कि पीढ़ियों से चला आ रहा एक प्रिय व्यंजन आराम के बजाय खतरा बन गया है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Sep 16, 2023 पर 6:38 PM
साइलेंट किलर है यह थाई डिश, केवल एक बाइट भी बन सकती है कैंसर की वजह
कई ग्रामीण यह सुनकर हैरान रह जाते हैं कि पीढ़ियों से चला आ रहा एक प्रिय व्यंजन आराम के बजाय खतरा बन गया है।

अगर आप थाई डिश खाने के शौकीन हैं तो यह खबर पढ़ना जरूरी है। एक थाई डिश ऐसी है, जो कैंसर का कारण बन रही है और थाइलैंड में अब तक 20000 लोगों की जान ले चुकी है। इस डिश की केवल एक बाइट खा लेने से भी कैंसर हो सकता है। कच्ची मछली, मसालों और नींबू को कूटकर/पीसकर तैयार होने वाली इस डिश का नाम 'कोइ प्ला' (koi pla) है। यह तीखी डिश जल्द बनने वाली, सस्ती और स्वादिष्ट होती है। लेकिन मछलियों में पैरासाइट्स भी होते हैं, जो घातक लिवर कैंसर का कारण बन सकते हैं। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, इस बीमारी से सालाना 20,000 थाइलैंडवासियों की मौत हो रही है। इनमें से अधिकतर थाइलैंड के पूर्वोत्तर से हैं, जो कि एक बड़ा व गरीब क्षेत्र है। इसे इसान के नाम से जाना जाता है और यहां पीढ़ियों से 'कोइ प्ला' डिश खाई जा रही है। अब पूरी दुनिया में इसी क्षेत्र में कोलेंजियोकार्सिनोमा (CCA) यानि पित्त नली के कैंसर के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। CCA होने के प्रमुख कारणों में से एक परजीवी फ्लैटवर्म या फ्लूक है, जो मेकांग क्षेत्र का मूल निवासी है और मीठे पानी की कई मछलियों में पाया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक बार खाने के बाद ये कीड़े पित्त नलिकाओं में वर्षों तक बिना पता लगे रह सकते हैं, जिससे सूजन हो सकती है। यह समय के साथ गंभीर कैंसर को ट्रिगर कर सकती है। लिवर सर्जन नारॉन्ग का कहना है कि यह स्वास्थ्य पर बहुत बड़ा बोझ है। यह परिवारों, शिक्षा और सामाजिक आर्थिक विकास को प्रभावित करता है।

ग्रामीणों को बचाने की शुरू हो चुकी है कवायद

AFP की रिपोर्ट के अनुसार, 'कोइ प्ला' से जान को हो रहे जोखिम और इसके जानलेवा परिणामों को देखने के बाद, नारॉन्ग अब इस "साइलेंट किलर" पर हमला करने के लिए वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और मानवविज्ञानियों के साथ काम कर रहे हैं। वे इसान प्रांतों में लिवर फ्लूक के लिए ग्रामीणों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं और उन्हें कोइ प्ला व अन्य जोखिम भरी फर्मेंटेड फिश डिशेज के खतरों से आगाह कर रहे हैं। लेकिन एक ऐसे क्षेत्र में खाने की आदतों को बदलना कोई आसान काम नहीं है, जहां इसान के प्रसिद्ध मिर्च युक्त व्यंजनों के लिए प्यार गहरा है।

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