Uttarakhand Avalanche: उत्तराखंड हिमस्खलन हादसे में मृतकों की संख्या 5 हुई, बर्फ में फंसे 3 मजदूरों की तलाश जारी

Uttarakhand Avalanche: उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम के पास माणा गांव में सीमा सड़क संगठन (BRO) के शिविर पर हुए हिमस्खलन में कई फुट बर्फ के नीचे अब भी फंसे तीन मजदूरों को निकालने के लिए रविवार को तीसरे दिन खोजी कुत्तों और हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाव अभियान फिर से शुरू किया गया

अपडेटेड Mar 02, 2025 पर 2:28 PM
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Uttarakhand Avalanche: बर्फ में फंसे मजदूरों को निकालने का काम तीसरे दिन भी जारी है

Uttarakhand Avalanche: उत्तराखंड के चमोली जिले में माणा गांव के पास सीमा सड़क संगठन (BRO) के शिविर में भारी हिमस्खलन हुआ, जिसमें 54 मजदूर बर्फ के नीचे दब गए। बचाव दल ने अब तक 46 मजदूरों को बचा लिया है। लेकिन हादसे में पांच मजदूरों की दुखद मौत हो गई। बद्रीनाथ धाम के पास हुए हिमस्खलन में कई फुट बर्फ के नीचे अब भी फंसे तीन मजदूरों को निकालने के लिए रविवार (2 फरवरी) को तीसरे दिन खोजी कुत्तों और हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाव अभियान फिर से शुरू किया गया। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि अब तक 54 लोगों में से 51 लोगों को निकाला जा चुका है। इनमें से 5 की दुखद मौत हो चुकी है।

28 फरवरी को हुए हादसे के बाद हिमस्खलन प्रभावित स्थल से शनिवार को कम से कम 50 श्रमिकों को बचाया गया। लेकिन उनमें से चार ने दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने रविवार को बर्फ में फंसे चार और श्रमिकों को बचाने के लिए फिर से प्रयास शुरू किए। हालांकि, रविवार सुबह सेना को एक और शव मिला, जिससे मरने वालों की संख्या पांच हो गई। शव को माना चौकी लाया जा रहा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर माणा में जारी बचाव कार्यों का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों को हिमस्खलन से प्रभावित बिजली, संचार तथा अन्य सुविधाओं को जल्द से जल्द सुचारू करने के निर्देश दिए।


चमोली के जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि मौसम साफ है। फंसे मजदूरों को निकाले जाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान सुबह फिर शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि लापता मजदूरों की खोजबीन के लिए दिल्ली से 'GPR (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) सिस्टम' भी आने वाला है।

करीब 3,200 मीटर की उंचाई पर भारत-चीन सीमा पर स्थित आखिरी गांव माणा में शुक्रवार को हिमस्खलन होने से बीआरओ शिविर में आठ कंटेनर में रह रहे सीमा सड़क संगठन के 54 मजूदर बर्फ में फंस गए थे। मजदूरों की संख्या पहले 55 बताई जा रही थी। लेकिन एक मजदूर के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित अपने घर सुरक्षित पहुंच जाने की सूचना मिलने के बाद यह संख्या 54 रह गयी है ।

मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और उत्तर भारत के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा भी बचाव अभियान की निगरानी करने के लिए हिमस्खलन स्थल पर पहुंच गए हैं। तलाशी एवं बचाव अभियान में भारतीय सेना की एविएशन कोर के तीन हेलीकॉप्टर, भारतीय वायु सेना के दो और सेना द्वारा किराए पर लिए गए एक सिविल हेलीकाप्टर सहित छह हेलीकाप्टर जुटे हुए हैं ।

चार लापता मजदूरों में हिमाचल प्रदेश के हरमेश चंद, उत्तर प्रदेश के अशोक और उत्तराखंड के अनिल कुमार एवं अरविंद सिंह शामिल हैं। सेना के अधिकारियों ने शनिवार को बचाव अभियान अधिकांश रूप से सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से ही चलाया। क्योंकि घटनास्थल तक पहुंचने का मार्ग कई स्थानों पर बर्फ से बाधित है। उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता यह है कि बर्फ से निकाले गए मजदूरों को ज्योतिर्मठ में सेना के अस्पताल तक पहुंचाया जाए और लापता लोगों को बाहर निकला जाए।

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लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने कहा कि अगर मौसम अनुमति देगा तो लापता लोगों की तलाश के लिए रेको रडार, मानव रहित विमान (यूएवी), क्वाडकॉप्टर और हिमस्खलन बचाव में इस्तेमाल होने वाले कुत्तों को लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सब मौसम पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, भारतीय वायु सेना, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन सेवा के 200 से अधिक लोग बचाव कार्य में लगे हुए हैं।

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