पहाड़ी नमक की धमक विदेश तक पहुंची, सिलबट्टे में पीसकर बनाती हैं महिलाएं, खाने का स्वाद होता है दोगुना

उत्तराखंड का पहाड़ी नमक पूरी दुनिया में मशहूर हो गया है। देश-विदेश में इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है। पहाड़ी नमक को सिलबट्टे में पीसकर बनाया जाता है। इसमें लहसुन, पुदीना, साधारण नमक, हरी मिर्च, काला नमक, काली मिर्च पाउडर, भांग के दाने, सरसों के दाने, धनिया आदि मिलाकर इसे बारीकी से पीसा जाता है

अपडेटेड Oct 07, 2024 पर 2:06 PM
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पहाड़ी नमक को पिसी लूण कहा जाता है। यह गीला और सूखा दो तरह का होता है।

उत्तराखंड अपनी पारंपरिक खानपान और समृद्ध संस्कृति के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस राज्य में पारंपरिक खाद्य पदार्थों को खास महत्व दिया जाता है। इनमें से एक महत्वपूर्ण तत्व है “पिसी लूण” या पहाड़ी नमक भी है। यह उत्तराखंड का एक अनोखे तरह का नमक है। इसकी धमक सात समंदर पार तक पहुंच गई हैं। स्थानीय व्यंजनों में इसका खूब इस्तेमाल होता है। यह गीला और सूखा दो तरह का होता है। दोनों को लंबे समय तक स्टोर कर सकते हैं। इस नमक को बनाने में कई चीजों को मिलाया जाता है। यह नमक भोजन के स्वाद को दोगुना कर देता है।

पहाड़ी नमक विशेष रूप से उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों में लोकप्रिय है। इसे बनाने की विधि भी बहुत विशिष्ट होती है। इसे देसी सिलबट्टे में पीसकर बनाया जाता है। यह खास नमक सलाद, ककड़ी, सब्जी, रोटी, छाछ, और दही के साथ परोसा जाता है। इससे व्यंजनों में एक अनूठा स्वाद आता है।

जानिए कैसे बनता है पहाड़ी नमक


स्थानीय महिला महिला किरण पांडे ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि पहाड़ी नमक बनाने के लिए पहले सिलबट्टे को साफ पानी से धोया जाता है। इसके बाद इसमें लहसुन, पुदीना, साधारण नमक, हरी मिर्च, काला नमक, काली मिर्च पाउडर, भांग के दाने, सरसों के दाने, धनिया आदि मिलाकर पीसा जाता है। इन सभी चीजों को हाथ से पीसकर बारीक किया जाता है। एक बार तैयार हो जाने पर इसे तुरंत खा सकते हैं। इसके अलावा इस नमक को लंबे समय तक स्टोर भी कर सकते हैं। एक गीला और दूसरा सूखा दो तरह का पहाड़ी नमक होता है। सूखे नमक को दूर रिश्तेदारों तक भेजा जा सकता है। वहीं गीले नमक को तुरंत पीसकर खाया जाता है।

पहाड़ी नमक सेहत के लिए फायदेमंद

दोनों तरह के नमक को स्टोर करके लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके मसालों में मौजूद औषधीय गुण सेहत के लिए फायदेमंद हैं। पहाड़ी लोग सब्जी न होने पर पिसी लूण से ही रोटियां, पूड़ी या पराठे खाना पसंद करते हैं।

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