Ven Ajahn Siripanyo: भीख मांग कर जी रहा है अरबपति का बेटा, हजारों करोड़ के साम्रज्य को ठुकराकर बना संन्यासी

Ven Ajahn Siripanyo: अरबपति ने आध्यात्मिकता की खोज में अपनी अरबों की विरासत को छोड़ दिया है। वेन अजान सिरिपान्यो ऐशोआराम की जिंदगी छोड़ भिक्षु बन चुके हैं। वह चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व मालिक और जाने-माने दानवीर आनंद कृष्णन के बेटे हैं। उनके पिता आनंद कृष्णन टेलीकॉम दिग्गज रहे हैं। वेन अजान सिरिपन्यो ने 18 साल की उम्र में ही अरबों की पारिवारिक विरासत को त्याग दिया था

अपडेटेड Nov 27, 2024 पर 1:55 PM
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Ven Ajahn Siripanyo: वेन अजान सिरिपन्यो की मां एम सुप्रिंदा चक्रबान के पारिवारिक संबंध थाइलैंड के शाही राजघराने से हैं।

आज की यह भागदौड़ भरी जिंदगी डिजिटल के साथ अर्थयुग भी है। हर कोई पैसे की पीछे भाग रहा है। लोग अपने जीवन में पैसा कमाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। अपनी पूरी जिंदगी पैसा कमाने में लगा देते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा मामला बता रहे हैं। जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। एक अरबपति के बेटे ने आध्यात्मिकता की खोज में अपनी अरबों की विरासत को छोड़ दिया है। जी हां चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व मालिक और जाने-माने दानवीर आनंद कृष्णन के बेटे वेन अजान सिरिपन्यो ने 18 साल की उम्र में ही भिक्षु बन गए हैं। उनकी संपत्ति करीब 40,000 करोड़ रुपये है।

वेन मलेशियाई अरबपति के बेटे हैं। उनके पिता आनंद कृष्णन टेलीकॉम दिग्गज रहे हैं। आनंद कृष्‍णन का बिजनेस टेलीकॉम के अलावा सैटेलाइट, मीडिया, ऑयल एंड गैस और रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में भी फैला हुआ है। रॉबिन शर्मा नामक एक बेस्टसेलर ''द मॉन्क हू सोल्ड हिज फेरारी" में भी शख्स की कहानी बयां की गई है। मलेशियाई अरबपति आनंद कृष्णन के इकलौते बेटे, न अजान सिरिपन्यो ने बौद्ध भिक्षु बनने के लिए राजमहल छोड़ दिया।

आनंद कृष्णन मलेशिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति


आनंद कृष्णन को AK के नाम से भी जाना जाता है। उनकी कंपनियों में एयरसेल भी शामिल थी। वही एयरसेल जो कभी IPL टीम चेन्नई सुपर किंग्स की प्रायोजक थी। कृष्णन मलेशिया के तीसरे सबसे अमीर आदमी हैं। उनकी संपत्ति 5 अरब डॉलर (करीब 40,000 करोड़ रुपये) से अधिक है। एक बौद्ध और समाजसेवी होने के नाते आनंद कृष्णन शिक्षा और मानवीय कार्यों के लिए दान करते हैं। कहा जाता है कि उनके बेटे सिरिपान्यो ने सिर्फ 18 साल की उम्र में भिक्षु बनने का फैसला किया। हालांकि, उनके इस फैसले के पीछे के कारणों के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं है। अपने पिता के करोड़ों के साम्राज्य को चलाने के बजाय सिरिपान्यो ने सादगी का जीवन जीने और भीख मांगने का फैसला किया।

शाही परिवार के वंशज हैं वेन अजान

दो दशक से भी अधिक समय हो गया है जब सिरिपान्यो ने उस सारी दौलत का त्याग कर दिया। एक भिक्षु के रूप में वह जंगल में रहने लगे। वह थाईलैंड के दताओ डम मठ के मठाधीश हैं। यह भी दावा किया जाता है कि भिक्षु अपनी मां की ओर से थाई शाही परिवार के वंशज हैं। कहा जाता है कि सिरिपान्यो को 8 भाषाओं का ज्ञान हैं। जिसमें अंग्रेजी, थाई और तमिल जैसी भाषाएं भी शामिल हैं। फिलहाल सिरिपान्यो के शुरुआती जीवन के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन बताया जाता है कि उनका पालन-पोषण उनकी 2 बहनों के साथ ब्रिटेन में हुआ था।

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