फरवरी में ही लगने लगी गर्मी वाली तीखी धूप, किसानों के लिए खतरनाक है ये मौसम का बदलाव

उत्तर भारत के कई राज्यों में इस बार जनवरी के महीने में ही कुछ जगहों पर दोपहर में तेज धूप निकल रही थी। जिससे लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा है। इस बार के मौसम में हो रहे बदलाव ने किसानों काफी परेशान है

अपडेटेड Feb 14, 2025 पर 1:48 PM
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ऐसी गर्मी आमतौर पर मार्च-अप्रैल में देखने को मिलती थी, लेकिन इस साल फरवरी में ही गर्मी बढ़ने लगी है

उत्तर भारत के कई राज्यों से ठंड ने विदाई ले ली है। इस बार जनवरी के महीने में ही कुछ जगहों पर दोपहर में तेज धूप निकल रही थी। जिससे लोगों को गर्मी का एहसास हो रहा था। इस बार के मौसम में हो रहे बदलाव ने किसानों काफी परेशान है। पिछले कुछ दिनों से दिन और रात के तापमान में 17 डिग्री सेल्सियस तक का अंतर देखने को मिल रहा है। यह गर्मी आमतौर पर मार्च-अप्रैल में देखने को मिलती थी, लेकिन इस साल फरवरी में ही गर्मी बढ़ने लगी है।

फरवरी में ही पड़ रही गर्मी

उत्तर भारत में आमतौर पर फरवरी के पहले हफ्ते तक घना कोहरा रहता था, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ। केवल कुछ दिनों तक ही कोहरा देखने को मिला उसके बाद मौसम साफ होने लगा। साफ आसमान की वजह से सूरज की किरणें सीधा धरती पर पड़ रही हैं, जिससे दिन में तेज धूप हो रही है। जानकारों के मुताबिक अगर फरवरी में ही अप्रैल-मई जैसी गर्मी पड़ने लगी तो गेहूं और रबी फसलों को नुकसान हो सकता है। बीते कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी से किसान परेशान हैं। आधी जनवरी के बाद से ही दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं ने किसानों को चिंता को बढ़ा दी है।


किसानों को बेसब्री से कोहरे और ठंड का इंतजार रहता है ताकि उनकी गेहूं, चना और सरसों की फसल अच्छी तैयार हो। जानकारों का कहना है कि शुष्क हवाओं की वजह से पछेती फसलों के दाने भी पतले पड़ सकते है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से बदला मौसम

पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) का असर मौसम पर गहरा पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। एक के बाद एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है। इसकी वजह से दक्षिण भारत से आने वाली सूखी हवाएं उत्तर भारत तक पहुंच रही हैं, जिससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में गर्मी महसूस हो रही है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस मौसम में अचानक बदलाव लाता है। इससे अचानक कभी तेज हवाएं, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना हो सकती है जो फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर गेहूं, सरसों और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है।

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