Marriage Age: सभी धर्मों पर लागू होगा लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल करने वाला नया कानून, जानें पूरी डिटेल

यह नया कानून लागू हुआ तो सभी धर्मों में लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र बदल जाएगी

अपडेटेड Dec 17, 2021 पर 10:43 AM
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बेटियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने की तैयारी है

Marriage Age: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लड़कियों के विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु को 18 साल से बढ़ाकर पुरुषों के बराबर 21 साल करने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने लड़कों और लड़कियों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र एक समान, यानी 21 साल करने के विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को कानूनी शक्ल देने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन किया जाएगा। यह नया कानून लागू हुआ तो सभी धर्मों और वर्गों में लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र बदल जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, सरकार बाल विवाह (रोकथाम) अधिनियम, 2006 (The Prohibition of Child Marriage Act, 2006 (PCMA)) को संशोधित करने संबंधी विधेयक संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में ला सकती है। यह प्रस्तावित विधेयक विभिन्न समुदायों के विवाह से संबंधित पर्सनल लॉ में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रयास कर सकता है ताकि शादी के लिए आयु एक समान सुनिश्चित की जा सके।

अभी 18 साल है शादी की उम्र


मौजूदा कानूनी प्रावधान के तहत लड़कों के विवाह लिए न्यूनतम आयु 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल निर्धारित है। विवाह से जुड़ी न्यूनतम आयु एक समान करने का यह निर्णय उस समय किया गया है जब इससे एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार इस बारे में विचार कर रही है कि महिलाओं के लिए न्यूनतम आयु क्या होनी चाहिए। यह निर्णय समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली की अध्यक्षता वाले कार्यबल की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है।

पीएम मोदी ने किया था बदलाव का ऐलान

पिछले साल 15 अगस्त को देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर सरकार समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा था कि लड़कियों की शादी की सही उम्र क्या हो, इसके लिए कमेटी बनाई गई है, उसकी रिपोर्ट आते ही युवतियों की शादी की उम्र को लेकर उचित फैसला लिया जाएगा। सांसद जया जेटली की अध्यक्षता में 10 सदस्यों की टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो इस पर अपने सुझाव जल्द ही देगी।

1978 में किया गया था आखिरी बदलाव

लड़कियों की न्यूनतम उम्र में आखिरी बदलाव 1978 में किया गया था और इसके लिए शारदा एक्ट 1929 में परिवर्तन कर उम्र 15 से 18 की गई थी। इसके बाद 2006 में बाल विवाह रोकथाम कानून लाया गया था। UNICEF के अनुसार भारत में हर साल 15 लाख लड़कियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हो होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 18 से 21 साल के बीच शादी करने वाली युवतियों की संख्या करीब 16 करोड़ है।

सभी धर्मो में अभी क्या है शादी की उम्र?

इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट 1872, पारसी मैरिज एंड डिवोर्स एक्ट 1936, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937, हिंदू मैरिज एक्ट 1955 और द हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956, सभी के अनुसार शादी करने के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़कियों की 18 वर्ष होनी चाहिए। इसमें धर्म के हिसाब से कोई बदलाव या छूट नहीं दी गई है। फिलहाल बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 लागू है, जिसके मुताबिक 21 और 18 से पहले की शादी को बाल विवाह माना जाएगा। ऐसा करने और करवाने पर 2 साल की जेल और एक लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

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हालांकि, शादी से संबंधित विभिन्न धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों के अब तक अपने स्वयं के मानक थे। उदाहरण के तौर पर हिंदू विवाह अधिनियम ने लड़कियों के लिए 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष की शादी की आयु तय की है, जबकि मुसलमानों के लिए व्यक्तिगत कानून ने लड़कियों की शादी को 15 वर्ष की अनुमति दी है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि संशोधन विधेयक जल्द ही संसद में लाया जाएगा और इसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्णय करार दिया, जिसमें महिलाओं और लड़कियों के जीवन को बदलने की क्षमता है, और यह लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम आगे है।

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