पर्यटन के लिहाज से असीम संभावनाओं वाले उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का विशेष जोर टूरिज्म सेक्टर को वैश्विक पटल पर नई पहचान देने पर है। पर्यटन विभाग अब दुनियाभर के देशों को यूपी में आमंत्रित करने के लिए मिशन मोड में जुटा हुआ है। इसी क्रम में मध्य पूर्व का पेरिस कहा जाने वाला देश लेबनान का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उत्तर प्रदेश का दौरा करेगा।
News18 ने राज्य में अगले 10 साल के लिए 2023 से लागू होने वाली पर्यटन नीति के मसौदे की समीक्षा की है। न्यूज 18 के मुताबिक, दस्तावेज में कहा गया है कि सूचना, स्वागत, सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता, संरचना और सहयोग इस नीति के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
क्या है नई पर्यटन नीति का उद्देश्य?
यूपी घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए भारत में एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इसी को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार का प्लान नई पर्यटन नीति का उद्देश्य, टूरिज्म से होने वाली आय को बढ़ाना, पर्यटकों की संख्या में इजाफा करना और बार-बार उन्हें उत्तर प्रदेश आने के लिए प्रोत्साहित करने वाला माहौल देना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा में स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल राज्य को विवाह स्थल के रूप में बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन का आयोजन, दुधवा वाइफ लाइफ सैंक्चुअरी में हॉट बैलून की सवारी, कारवां और ग्रामीण पर्यटन की शुरुआत, आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, लखनऊ का गलावती कबाब और मलिहाबाद के आम… ये सभी चीजें यूपी की नई टूरिज्म पॉलिसी का हिस्सा होंगी। इन्हें योगी सरकार देश और दुनिया के सामने राज्य की विशेषताओं के रूप में पेश करेगी।
विशेष मार्केटिंग और प्रचार गतिविधियों पर जोर
पर्यटन स्थलों को ग्लोबल बनाने के लिए योगी सरकार यूपी में विशेष मार्केटिंग और प्रचार गतिविधियों के साथ बड़े पैमाने पर लगभग एक दर्जन कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है। इन आयोजनों में ड्रोन शो और लाइट एंड साउंड शो जैसी चीजें शामिल होंगी।
विशेष कार्यक्रमों में अयोध्या का दीपोत्सव, रामायण मेला, देव दीपावली, हॉट एयर बैलून फेस्टिवल, नवरात्रि महोत्सव, महाशिवरात्रि महोत्सव, विश्व पर्यटन दिवस, काशी विश्वनाथ धाम, बौद्ध सम्मेलन, रंगोत्सव, कुंभ मेला और कृष्णोत्सव शामिल होंगे। ये सभी कार्यक्रम उत्तर प्रदेश पर्यटन की ब्रैंडिंग करेंगे।