Vedanta के फाउंडर अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) अपनी जिंदगी से जुड़े कई ऐसी बातें बताते रहते हैं, जो युवाओं को प्रेरित करती हैं। हाल में उन्होंने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में वेदांता की लिस्टिंग की कहानी बताई थी। उन्होंने यह भी बताया था कि लंदन जाने की तैयारी परिवार ने किस तरह की थी। एक बार फिर, उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपने और अपने परिवार से जुड़ी बातें बताई हैं।
68 साल के अग्रवाल ने LinkedIn पर एक बड़ा पोस्ट लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे अपनी सात साल की पोती 'माही' को Cinderella पढ़कर सुनाने के दौरान वह अपने बचपन की यादों में खो जाते हैं। उन्होंने मुंबई में अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया है।
उन्होंने बताया है कि उनकी पोती को Cinderella का वह हिस्सा सबसे पसंद है जब फेयरी गॉडमदर मैजिक दिखाती हैं और सिंड्रेला को अलग रूप में बदल देती हैं। यह पूछने पर कि क्यों यह हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद है, माही कहती है कि इससे वह भी जो चाहे बन सकती है।
अग्रवाल कहते हैं, "आपके पास वह पावर है, जिससे आप खुद को बदल सकते हैं।" उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों का एक वाकया बताया है। उन्होंने बताया है कि सही 'ड्रेस एंड एड्रेस' के मंत्र में शुरू से उनका यकीन रहा है। सही ड्रेस का उनका मतलब यह है कि हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारे कपड़े हमेशा साफ हों। जरूरी नहीं कि वे महंगे हों, लेकिन क्रिस्प और क्लीन होने से आप दूसरों से अलग दिखाई देंगे।
वेंदाता के फाउंडर ने बताया कि राइट एड्रेस (address) का मतलब दो चीजें हैं। पहला, लोकेशन (address) और दूसरा यह कि हमें हर व्यक्ति के साथ उदारता के साथ पेश आना चाहिए। अगर आप ऐसी जगह के करीब रहते हैं, जो गतिविधियों का केंद्र है तो आप पर इसका असर पड़ता है।
अपनी पोस्ट में उन्होंने बताया है कि शुरुआती दिनों में वह उस व्यक्ति के जैसे कपड़े पहना करते थे, जिसकी तरह वह बनना चाहते थे। वह ओबरॉय में मीटिंग के लिए पैसे बचाने के लिए कई बार भूखे रह जाते थे। ओबरॉय बड़े इनवेस्टर्स के लिए लोकप्रिय जगह था। सड़क के किनारे आयरन करने वाले धोबी से अपने कपड़े इस्त्री कराकर वह ओबरॉय पहुंच जाते थे। उन्होंने यह भी बताया है कि शुरू में उनके पास सिर्फ एक सूट था। इस ग्रे सूट ने उन्हें कई बिजनेस डील करने में मदद की थी।
अग्रवाल कहते हैं कि लंदन पहुंचने के बाद उन्होंने वहां के तौर-तरीके अपनाने शुरू कर दिए। उन्होंने बताया कि साथ-सुथरे कपड़े पहनने और सभी से उदारता से मिलने की वजह से उन्हें अपनी शुरुआती छवि बनाने में मदद मिली। उन्होंने लिखा है कि जब मैं लंदन चला गया तो मैंने उन इलाकों में समय बिताना शुरू किया जहां मेरी मुलाकात संभावित इनवेस्टर्स और बैंकर्स से हो सकती थी। ब्रिटिश लोग अपने कपड़ों को लेकर बहुत संजीदा होते हैं, इसलिए मैंने खुद को उनके कल्चर में ढाल लिया।
अपने पोस्ट के आखिर में उन्होंने कहा है कि चाहे जो भी हो जाए हमें कड़ी मेहनत को अपनी फेयरी गॉडमदर बनानी चाहिए। बिजनेस के बॉलरूम में हार्ड वर्क को अपनी फेयरी गॉमदर बनाएं। आप जो भी है, उसे बदलने की जरूरत नहीं है, लेकिन मैजिक की तरह अपने अंदर की अच्छाई को बाहर लाएं।