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प्राइवेट हॉस्पिटल्स की ज्यादती पर लगेगी लगाम, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि हेल्थकेयर सर्विसेज और डॉक्टर्स (Healthcare Services and Doctors) कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) के दायरे से बाहर नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 30, 2022 पर 12:00 PM
प्राइवेट हॉस्पिटल्स की ज्यादती पर लगेगी लगाम, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साफ हो गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ कंजूमर कोर्ट में शिकायत की जा सकती है। इससे आम लोगों को उन प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ शिकायत करने में सुविधा होगी, जो पैसे तो खूब वसूलते हैं, लेकिन इलाज में लापरवाही के मामलों से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

अगर आपने कभी प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी का सामना किया होगा तो आप जानते होंगे कि यह कितना परेशान करने वाला होता है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले (Supreme Court Verdict) से इस मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद बंधी है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि हेल्थकेयर सर्विसेज और डॉक्टर्स (Healthcare Services and Doctors) कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) के दायरे से बाहर नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला दिया।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और हिमा कोहली की बेंच ने इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सही करार दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था डॉक्टर्स और हेल्थकेयर सर्विसेज कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे में आते हैं। दरअसल, मेडिकोस लीगल एक्शन ग्रुप नाम के एक एनजीओ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया था।

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एनजीओ के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा 1986 के कानून में सर्विसेज की परिभाषा में हेल्थकेयर का जिक्र नहीं है और इसे सर्विसेज की परिभाषा में शामिल करने का प्रस्ताव था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके जवाब में बेंच ने कहा कि कानून में कहा गया है "किसी तरह की सर्विसेज"। उसने यह भी कहा कि सर्विस की परिभाषा बहुत व्यापक है और अगर संसद इसे सर्विस की परिभाषा से बाहर करना चाहती थी तो उसने इसके बारे में बताया होता।

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