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IPO में बैंकों का इनवेस्टमेंट बढ़ा, चार साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा निवेश

बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस साल IPO में अपने निवेश को लगभग दोगुना करके ₹870 करोड़ कर लिया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 21, 2021 पर 3:58 PM
IPO में बैंकों का इनवेस्टमेंट बढ़ा, चार साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा निवेश

बैंकों (Banks) और वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) रूट के जरिए इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (IPO) में अपना निवेश बढ़ाया है, जो 2021 में अब तक के चार साल के उच्चतम स्तर को छू गया है। Mint ने प्राइम डेटाबेस से मिले डेटा के अनुसार बताया कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस साल आईपीओ में अपने निवेश को लगभग दोगुना करके ₹870 करोड़ कर लिया है, जो 2019 में ₹461 करोड़ था।

पिछले साल, भले ही प्राइमरी मार्केट Covid-19 के कारण छह महीने से ज्यादा समय तक स्थिर रहा, लेकिन उस दौरान भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने IPO में ₹698 करोड़ का निवेश किया।

2017 में, IPO के जरिए रिकॉर्ड फंड जुटाया था, तब बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने QIB रूट के जरिए 4,548 करोड़ रुपए का निवेश किया था। डेटा से पता चला है कि अब तक 2021 में, IPO ने पिछले साल ₹26,108 करोड़ के मुकाबले ₹27,417 करोड़, 2019 में ₹11,036 करोड़ और 2018 में ₹30,615 करोड़ जुटाए।

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इस विश्लेषण में सरकार द्वारा संचालित कंपनियों जैसे गार्डन रीच, MSTC, RVNL, IRCTC, मझगांव डॉक और लिथिका इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ से शुरू किए गए एंकर इनवेस्टर्स और IPO शामिल नहीं हैं।

बैंक पिछले कई सालों से अपनी ट्रेजरी बुक के जरिए IPO में निवेश कर रहे हैं। ज्यादातर बैंक 300 से 500 करोड़ रुपए के लिए इंटरनल अप्रूवल लेते हैं और आखरि में IPO में ₹50-100 करोड़ का इनवेस्ट करते हैं। हालांकि, उनका पहला उद्देश्य अक्सर लिस्टिंग गैंस कमाना होता है।

2019 में ही सिर्फ ऐसा हुआ था, जब बैंकों ने स्टर्लिंग और विल्सन के IPO को बाहर कर दिया, क्योंकि इसके जरिए पार पाना मुश्किल हो गया था।

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