CMS Info systems IPO: शेयर अलॉटमेंट पर टिकी हैं सभी की निगाहें, इससे पहले जानें क्या है GMP

पब्लिक इश्यू को 1.95 गुना सब्सक्राइब किया गया था, जबकि इसके रिटेल हिस्से को 2.15 गुना सब्सक्राइब किया गया था

अपडेटेड Dec 26, 2021 पर 4:37 PM
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पब्लिक इश्यू को 1.95 गुना सब्सक्राइब किया गया था

CMS Info systems IPO: 23 दिसंबर 2021 को सब्सक्रिप्शन बंद होने के बाद, अब सभी की निगाहें CMS इंफो सिस्टम्स IPO अलॉटमेंट डेट पर टिकी हैं, जो कि 28 दिसंबर 2021 को होने की संभावना है। CMS इंफो सिस्टम्स के IPO सब्सक्रिप्शन स्टेटस के मुताबिक, पब्लिक इश्यू को 1.95 गुना सब्सक्राइब किया गया था, जबकि इसके रिटेल हिस्से को 2.15 गुना सब्सक्राइब किया गया था।

शेयर अलॉटमेंट से पहले, ग्रे मार्केट भारत की कैश मैनेजमेंट कंपनी के शेयरों के लिए एक धीमी शुरुआत का संकेत दे रहा है। मार्केट ऑब्जर्वर्स के अनुसार, CMS इंफो सिस्टम के शेयर आज ग्रे मार्केट में 9 रुपए के प्रीमियम पर उपलब्ध हैं।

मार्केट ऑब्जर्वर्स ने कहा कि CMS इंफो सिस्टम IPO GMP आज 9 रुपए है, जो कल के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 5 रुपए से 4 रुपए ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 100% OFS पब्लिक इश्यू को निवेशकों से धीमी प्रतिक्रिया मिली।

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उन्होंने कहा कि CMS इंफो सिस्टम्स IPO GMP बोली बंद होने के बाद लगभग 5 रुपए से 12 रुपए तक उतार-चढ़ाव कर रहा है, इससे पता चलता है कि शेयर की लिस्टिंग इश्यू प्राइस के आसपास रहने वाली हैं।

इस GMP का क्या मतलब है?

मार्केट ऑब्जर्वर्स ने आगे कहा कि GMP किसी भी पब्लिक इश्यू से संभावित प्रीमियम के बारे में एक संकेत के अलावा और कुछ नहीं है। जैसा कि CMS इंफो सिस्टम IPO GMP आज 9 रुपए है, इसका सीधा सा मतलब है कि ग्रे मार्केट CMS इंफो सिस्टम की शेयर लिस्टिंग की उम्मीद लगभग 225 रुपए (216 रुपए + 9 रुपए) पर कर रहा है, जो कि 205-216 रुपए प्रति इक्विटी शेयर रुपए के अपने प्राइस बैंड से लगभग 5 प्रतिशत ज्यादा है।

हालांकि, शेयर बाजार के जानकारों का मानना ​​है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति ही कंपनी की ठोस तस्वीर पेश करती है। GMP का कंपनी की वित्तीय स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है और इसलिए इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

Mint के मुताबिक, CMS इंफो सिस्टम्स के संबंध में बुनियादी बातों पर ट्रस्टलाइन सिक्योरिटीज में अंकुर सारस्वत रिसर्च एनालिस्ट ने कहा, "पूरी प्रमोटर हिस्सेदारी गिरवी रखना, प्रमोटरों के अनुभव की कमी, बैंकिंग क्षेत्र पर पूरी निर्भरता, सीमित ग्राहक और बहुत प्रतिस्पर्धा के साथ ज्यादा रेगुलेशन और नियंत्रित वातावरण में काम करने जैसी कुछ गंभीर चिंताएं हैं। इसलिए, इस पब्लिश इश्यू को लेकर निवेशकों में ज्यादा रुचि नहीं दिखी।"

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