Hyundai India: IPO खुलने में बस कुछ घंटे बाकी, क्या GMP खराब करेगा खेल? तो अब पैसा लगाना चाहिए या नहीं!
Hyundai India का IPO 15 अक्टूबर को खुल रहा है और 17 अक्टूबर को बंद होगा। लेकिन Hyundai India ऐसी कंपनी नहीं है कि लिस्टिंग पर आपके पैसे डबल हो जाए। जानिए फिर क्यों मार्केट एक्सपर्ट्स इस इश्यू में पैसा लगाने की सलाह दे रहे हैं
Hyundai India का IPO 15 अक्टूबर को खुलेगा और 17 अक्टूबर को बंद होगा
Hyundai India IPO: देश का सबसे बड़ा IPO 15 अक्टूबर को खुलने वाला है। लेकिन इस आईपीओ के खुलने से पहले इसके GMP ने निवेशकों का मूड ऑफ कर दिया है। IPO के साथ दिक्कत ये है कि इसके GMP में जो गिरावट शुरू हुई है वो लगातार जारी है। अब फिर से इसमें 3 फीसदी की गिरावट आ गई है। ग्रे मार्केट में Hyundai India के अनलिस्टेड शेयरों का GMP अभी 65 रुपए है। जबकि सितंबर के आखिरी हफ्ते में इसका GMP 570 रुपए था। वैसे मार्केट एक्सपर्टस का कहना है कि कभी भी किसी IPO में निवेश का फैसला उसके GMP को देखकर नहीं बल्कि कंपनी के फाइनेंशियल्स को देखकर करना चाहिए।
Hyundai India IPO: कब खुल रहा है IPO और क्या है इश्यू प्राइस
Hyundai India का IPO 15 अक्टूबर को खुलेगा और 17 अक्टूबर को बंद होगा। जबकि एंकर इनवेस्टर्स के लिए यह इश्यू 14 अक्टूबर को खुला है। कंपनी का IPO 27,870 करोड़ रुपए है। इस हिसाब से यह फिलहाल देश का सबसे बड़ा इश्यू है। इससे पहले देश का सबसे बड़ा IPO LIC का था। जो 21,000 करोड़ रुपए का था।
इतना तो तय है कि Hyundai India IPO का वैल्यूएशन ज्यादा है। कंपनी के आईपीओ का इश्यू प्राइस 1865-1960 रुपए प्रति शेयर है। इश्यू प्राइस के हिसाब से Hyundai Motor India का वैल्यूएशन 19 अरब डॉलर है। जो पेरेंट कंपनी Hyundai Motor से भी ज्यादा है। कंपनी के CFO तरुण गर्ग ने एक PC में बताया कि इंडियन मार्केट में ग्रोथ ऑप्चर्यूनिटीज ज्यादा है। और यही वजह है कि कई बार मल्टीनेशनल कंपनियों की इंडियन यूनिट का वैल्यूएशन उसकी पेरेंट कंपनी से अलग होता है।
ब्रोकरेज फर्म इक्विटास इनवेस्टमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Hyundai Motor India का P/E रेशियो 27 गुना जबकि पेरेंट कंपनी का P/E रेशियो सिर्फ 5 गुना है। लिस्टिंग के बाद Hyundai Motor India का मार्केट कैप मूल कंपनी के 42 पर्सेंट के बराबर हो जाएगी।
Hyundai India IPO: क्या इस IPO में पैसा लगाना चाहिए?
ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस ने इस इश्यू को 'सब्सक्राइब' करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि ग्रोथ की मजबूत संभावनाओं, दमदार फाइनेंशियल्स और SUV Product की अच्छी रेंज से कंपनी के इश्यू को सपोर्ट मिल रहा है।
ICICI Securities के एनालिस्ट के मुताबिक, "हम इस आईपीओ से लिमिटेड लिस्टिंग गेन की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि ये उम्मीद है कि लिस्टिंग के बाद मीडियम से लॉन्ग टर्म में यह शेयर डबल डिजिट में रिटर्न दे सकता है।" ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल में अभी कंपनी के पास ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। इसके साथ ही Hyundai Motor India में यह क्षमता है कि वह ग्रोथ को पूरी तरह भुना सके।
कंपनी ट्रांसमिशंस और इंजन बनाती है। 1 अप्रैल 2021 से लेकर 30 जून 2024 के बीच कंपनी पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट करने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है।
वहीं शेयरखान ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वह डोमेस्टिक मार्केट के अलावा विदेशी मार्केट में भी अपनी पकड़ मजबूत बना रही है। फिस्कल ईयर 2024 में कंपनी के कुल वॉल्यूम में एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी 21 फीसदी है। कंपनी चाहती है कि साउथ एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के लिए बड़े पैमाने पर गाड़ियां एक्सपोर्ट करना चाहती है। हालांकि दूसरी कंपनियों के नए प्रोडक्ट लॉन्च करने से कंपनी के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ा है और इसका असर मुनाफे पर भी दिख सकता है।
SBI Securities ने भी 'Subscribe for Long Term'की रेटिंग देते हुए Hyundai Motor India के IPO में पैसा लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, मजबूत ब्रांड, ब्लॉकबस्टर मॉडल, एडवांस टेक्नोलॉजी और हाई एक्सपोर्ट की संभावनाओं से कंपनी दूसरी कॉम्पिटिटर कंपनियों से अलग है।
Hyundai Motor India के शेयरों की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को है। 2003 में मारुति सुजुकी की लिस्टिंग के बाद पहली बार कोई ऑटो कंपनी इंडियन शेयर मार्केट में लिस्ट हो रही है।
Hyundai India IPO: मारुति से कितना अलग है ये IPO
कंप्लीट सर्किल कंसल्टेंट्स के गुरमीत चड्ढा के मुताबिक, अगर हम कंपनी के नेट एसेट को देखें तो पता चलेगा कि मारुति के मुकाबले यह कहा है। नेट एसेट्स का मतलब है कि कितनी बार आप अपनी एसेट्स को यूज करते हैं। तो Hyundai का नेट एसेट्स 10 है क्योंकि यह तीन शिफ्ट में प्रोडक्शन करता है जबकि मारुति के लिए यह 8 है।
इसके अलावा Hyundai India के पोर्टफोलियो को देखें तो वह प्रीमियम है। मारुति का फोकस जहां लोअर एंड वाली गाड़ियों पर रहता है वहीं Hyundai India का फोकस SUV पर है। अगर हम फिस्कल ईयर 2024 के लिए इसका प्रोडक्ट मिक्स देखें तो (चार्ट) सबसे ज्यादा 63 फीसदी Suv, 23 फीसदी हैचबैक और सबसे कम 14 पर्सेंट सेडान है। क्रेटा और अपने कुछ दूसरे Key Brand के साथ Hyundai India ने SUV का मार्केट अच्छा पकड़ा है।
कंपनी ने अपना फोकस SUV में बढ़ाया और लोअर एंड सेडान का प्रोडक्शन बंद करके कुछ हद तक अपनी वॉल्यूम Sacrifice किया था। इसके पास 15 फीसदी मार्केट शेयर है। मारुति के बाद यह देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है।
अगर आप Hyundai India की पिछले दो-तीन साल की EPS ग्रोथ देखेंगे तो 27-28 फीसदी रही है। जबकि रेवेन्यू ग्रोथ 17-18 फीसदी है। लेकिन इस दौरान वॉल्यूम ग्रोथ सिर्फ 6 फीसदी रही।
अगर आप पिछले 9 महीनों का प्रॉफिट देखेंगे तो 4400 करोड़ के आसपास है। इसका मार्केट कैप फिलहाल 1.5 लाख करोड़ रुपए का है। यानि कंपनी का IPO 25-26 के मल्टीपल पी/ई पर मिल रहा है। मारुति के शेयर भी करीब 26-27 पी/ई पर हैं। यानि एक तरह से देखा जाए तो दोनों कंपनियों का पीई एक जैसा ही है। इस हिसाब से यह शेयर बहुत सस्ता नहीं है। बहुत महंगा भी नहीं है।
कंपनी के परफॉर्मेंस के लिहाज से एक जरूरी बात ये है कि इसने तालेगांव में जनरल मोटर्स का प्लांट खरीदा है। अब देखना है कि इस प्लांट से कितना प्रोडक्शन होता है। फिलहाल Hyundai India की प्रोडक्शन कैपासिटी 8-8.25 लाख यूनिट है। अगर इसमें तालेगांव प्लांट का प्रोडक्शन भी जुड़ जाता है तो यह 10 लाख यूनिट हो सकता है।
मुमकिन है कि तालेगांव प्लांट के प्रोडक्शन का इस्तेमाल एक्सपोर्ट के लिए किया जाए। कंपनी ने चीन पर अपनी निर्भरता कम की है। चीन के कई प्लांट बंद कर दिए हैं। ऐसे में अगर Hyundai India, भारत को एक्सपोर्ट हब बनाते हैं तो शेयरों को फायदा हो सकता है।
Hyundai India IPO: लिस्टिंग पर डबल नहीं होगा पैसा
Hyundai India ऐसी कंपनी नहीं है कि लिस्टिंग पर आपके पैसे डबल हो जाए। लिस्टिंग पर कुछ हद तक मुनाफा मुमकिन है लेकिन कंपनी के शेयर लॉन्ग टर्म में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
इंडिपेंडेंट कंसल्टेंट अंबरीशन बालिगा ने कंपनी को समझने के लिए इसके बैलेंस शीट पर फोकस किया है। उन्होंने कहा कि अगर हम कंपनी की बैलेंस शीट में डेट देखें तो वह 750 करोड़ का है जो बहुत कम है। अगर कंपनी कैश जेनरेट कर रही है तो उसे फंड की जरूरत नहीं है। इसिलए अगर कंपनी के प्रमोटर्स स्टेक बेच रहे हैं तो इसमें चिंता की बात नहीं है।
20 साल बाद किसी पैसेंजर व्हीकल का आईपीओ लिस्ट होने से मारुति के प्रीमियम पर असर पड़ सकता है। Hyundai India का रिटर्न रेशियो मारुति से बेहतर है।
Hyundai India IPO: इन बातों को लेकर चिंतित हैं निवेशक?
इस कंपनी के IPO को लेकर कुछ कंसर्न भी है। Kia Motorsऔर Hyundai India एक दूसरे से जिसतरह लिंक्ड हैं उसे लेकर निवेशक फिक्रमंद हैं। Kia motors में 34 फीसदी हिस्सेदारी Hyundai motor की है। जबकि Hyundai Motor की कई सब्सिडियरी में Kia motors की हिस्सेदारी है।
वैसे दोनों का कामकाज अलग-अलग है लेकिन प्रोडक्ट लाइनअप सेम है। तो क्या एक जैसे प्रोडक्ट के प्रोडक्शन की वजह से दोनों कंपनियां एक दूसरे के वॉल्यूम को नुकसान पहुंचा सकती हैं? इस पर कंप्लीट सर्किल कंसल्टेंट्स के गुरमीत चड्ढा का कहना है कि, बिल्कुल इसका नुकसान हो सकता है। अगर आप उनके कंपनी के टॉप 10 सप्लायर को देखें तो उसमें 33 पर्सेंट इंटरनल हैं। ऑटो इंडस्ट्री के लिए यूज होने वाला कॉस्ट ऑफ गुड्स सोल्ड मीट्रिक देखें तो इससे पता चलता है कि आप कितनी चीजें इंपोर्ट करते हैं। ऐसे में निवेशक चाहेंगे कि कंपनी का फोकस लोकलाइजेशन पर रहे।
तो सभी एक्ससपर्ट्स का कहना है कि अगर इस IPO में पैसा लगाना चाहते हैं तो लिस्टिंग गेन को भूल जाइए। लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए आप इसमें पैसा लगा सकते हैं।