यह समय न सिर्फ सेकेंडरी मार्केट के निवेशकों के लिए खराब है बल्कि आईपीओ इनवेस्टर्स के लिए भी अनफेवरेबल है। हर तीन आईपीओ में से करीब दो के शेयरों में इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेडिंग हो रही है। इससे बाजार के कमजोर सेंटीमेंट का पता चलता है। बीते एक साल में लिस्ट हुई कंपनियों में से करीब 66 फीसदी के शेयर आईपीओ के ऑफर प्राइस से नीचे चल रहे हैं।
