SBIFML IPO : भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी, SBI फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड(SBIFML)जल्द ही अपने मेगा इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए ड्राफ़्ट पेपर्स फ़ाइल करने वाली है। Moneycontrol को मिली जानकारी के मुताबिक इंडस्ट्री के कई सूत्रों ने बताया है कि यह IPO पूरी तरह से OFS (ऑफ़र फ़ॉर सेल) होगा। बता दें कि SBIFML देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और यूरोप की एसेट मैनेजमेंट सेक्टर की दिग्गज कंपनी अमुंडी (Amundi) का एक जॉइंट वेंचर है।
एक या दो दिन में ही SEBI के पास जमा किए जाएंगे ड्राफ़्ट पेपर्स
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक इस आईपीओ के ड्राफ़्ट पेपर्स बहुत जल्द,शायद एक या दो दिन में ही मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास जमा कर दिए जाएंगे। इस तरह के मार्केट लीडर की लिस्टिंग इस सेक्टर के लिए एक अहम घटना होगी।
12.6 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा है SBIFML का AUM
SBI और पेरिस स्थित अमुंडी की SBIFML में 61.98 प्रतिशत और 36.40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के ज़रिए ये कुल मिलाकर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। पहले मिली जानकारी के मुताबिक SBI अपनी 6.3 प्रतिशत और अमुंडी अपनी 3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी घटाएगा। दिसंबर 2025 तक, SBIFML 12.6 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का असेट मैनेज कर रहा था।
एक सूत्र के कहा कि IPO मार्केट के लिए यह बहुत ही अनिश्चित दौर है। ऐसे में कई इश्यू टाले जा रहे हैं। लेकिन SBIFML की लिस्टिंग प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है। IPO के लिए SEBI से मंज़ूरी मिलने के बाद इश्यू लॉन्च करने के लिए एक साल का समय होता है। साल के आखिर में मार्केटिंग और रोड शो होने के बाद,उस समय के मार्केट के हालात के आधार पर कंपनी के वैल्यूएशन का बेहतर अंदाज़ा लग पाएगा।
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि इस आईपीओ को मैनेज करने वाले सिंडिकेट में 9 इन्वेस्टमेंट बैंक होंगे। जिनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल,एक्सिस कैपिटल,जेफ़रीज़,SBI कैपिटल,ICICI सिक्योरिटीज़,मोतीलाल ओसवाल,HSBC सिक्योरिटीज़,JM फ़ाइनेंशियल और BofA सिक्योरिटीज़ शामिल हैं।
Moneycontrol को फाइलिंग योजनाओं पर SBI, SBIMFL, Amundi और इन्वेस्टमेंट बैंकों से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं मिल पाई। जैसे ही हमें इन पक्षों से कोई जानकारी मिलेगी आपको इसकी जानकारी दी जाएगी।
हाल ही में,केंद्र सरकार ने स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने की योजना बना रही बड़ी कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (minimum public shareholding)से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत एक बहुस्तरीय ढांचा पेश किया गया है, जो बड़ी कंपनियों को उनके IPO के समय जनता को शेयरों का एक छोटा हिस्सा पेश करने की मंजूरा देता है।