LIC IPO: केरल विधानसभा ने सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में हिस्सेदारी बेचने के केंद्र के फैसले पर चिंता जताते हुए और इसे सरकार के अधीन बनाए रखने का अनुरोध करते हुए बुधवार को आम सहमति से प्रस्ताव पारित किया है।
LIC IPO: केरल विधानसभा ने सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में हिस्सेदारी बेचने के केंद्र के फैसले पर चिंता जताते हुए और इसे सरकार के अधीन बनाए रखने का अनुरोध करते हुए बुधवार को आम सहमति से प्रस्ताव पारित किया है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने बुधवार को विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि LIC को निजी हाथों में देना देश के हित में नहीं होगा और केंद्र सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए।
विजयन ने कहा, "केंद्र सरकार अपने फैसले को यह कहकर सही ठहराने का प्रयास कर रही है कि इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के जरिए केवल 5 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी और यह LIC का निजीकरण नहीं है। लेकिन यह साफ है कि अपनी हिस्सेदारी बेचना निजीकरण की दिशा में पहला कदम है और सरकार का असल लक्ष्य यही है।"
उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि LIC का राष्ट्रीयकरण कर उसे एक सरकारी कंपनी क्यों बनाया गया था? इसका राष्ट्रीयकरण इसलिए हुआ था ताकि प्राइवेट कंपनियों के शोषण से स्टेकहोल्डर्स की रक्षा की जा सके और देश के कमजोर वर्गों और पिछड़े इलाकों में बीमा कवरेज को सुनिश्चित किया जा सके।"
उन्होंने कहा कि इतनी अहम संस्था को संसद में बिना किसी चर्चा या जांच का कोई मौका दिए बिना ही निजीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने फाइनेंस बिल में शामिल कर LIC एक्ट में संशोधन किए जाने को लेकर भी सरकार की आलोचना की।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि LIC ने समाज के लाभ के लिए अब तक 36.76 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है और संसाधन का यह विशाल स्रोत इसके निजीकरण के साथ ही खत्म हो जाएगा।
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।