LIC IPO: देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी LIC अपना इश्यू लाने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गई है। LIC 11 फरवरी को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स (DRHP) जमा करने वाली है। सरकार अपनी कितनी हिस्सेदारी बेचने वाली है इस बात का खुलासा DRHP दाखिल होने के बाद पता चलेगा। सरकार ने फैसला किया है कि LIC के पॉलिसीहोल्डर्स के लिए इश्यू का कुछ हिस्सा रिजर्व रखा जाएगा। साथ ही इस पर उन्हें कुछ डिस्काउंट भी दिया जाएगा। कुछ सूत्रों ने बताया है कि LIC के पॉलिसीहोल्डर्स को इसका IPO 5% कम दाम पर मिल सकता है।
कितनी हो सकती है LIC की वैल्यू
पिछले हफ्ते डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी तुहीन कांत पांडे ने ऐसे संकेत दिए थे कि LIC इसी हफ्ते इश्यू के लिए आवेदन जमा कर सकती है। पांडे ने हाल ही में रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि LIC की वैल्यू 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। और इसकी एंटरप्राइज वैल्यू इससे कई गुना हो सकती है। LIC का DRHP जमा होने के बाद यह पता चल पाएगा कि सरकार LIC में अपनी कितनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है।
इश्यू के बाद LIC का मालिकाना हक किसके पास रहेगा?
अभी LIC का मालिकाना हक सरकार के पास है। यह देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है। सरकार इस कंपनी में हिस्सेदारी बेचकर करीब 90,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष के डिसइन्वेस्टमेंट टारगेट को हासिल करने में मदद मिलेगी। आईपीओ के बाद भी एलआईसी पर सरकार का मालिकाना हक बना रहेगा। कानून के मुताबिक, एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं हो सकती। इसके अलावा 5 साल के दौरान सरकार LIC में अपनी 25 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं बेच सकती।