LIC का आईपीओ खुलने के दूसरे दिन शाम 3 बजे तक 89 फीसदी सब्सक्राइब हो गया था। पॉलिसीहोल्डर का कोटा 2.71 गुना सब्सक्राइब हुआ है। स्टाफ कोटा 1.85 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका है। रिटेल कोटा 82 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका है। आज शाम तक इस इश्यू के पूरी तरह सब्सक्राइब हो जाने की उम्मीद है।
सरकार एलआईसी के आईपीओ के जरिए कुल 22 करोड़ शेयर बेच रही है। एलआईसी के करीब 30 करोड़ पॉलिसीहोल्डर हैं। इनमें से कई आईपीओ में पैसे लगाना चाहते हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि रिटेल और पॉलिसीहोल्डर कैटेगरी में से किसमें अप्लाई करने पर शेयर एलॉट की ज्यादा संभावना होगी?
एलआईसी ने पॉलिसीहोल्डर्स, एंप्लॉयीज और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए शेयर एलॉटमेंट का कोटा तय किया है। पॉलिसीहोल्डर्स के लिए 10 फीसदी, एंप्लॉयीज के लिए 0.7 फीसदी और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी कोटा तय है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन लोगों के पास एलआईसी की पॉलिसी है, उन्हें पॉलिसीहोल्डर्स कोटा में बोली लगाना फायदेमंद रहेगा। दरअसल, कई लोग यह सोच रहे हैं कि रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी कोटा रिजर्व है, जबकि पॉलिसीहोल्डर्स के लिए 10 फीसदी कोटा तय है।
पॉलिसीहोल्डर्स का कोटा भले ही 10 फीसदी है, लेकिन इसमें शेयरों का आवंटन आनुपातिक आधार पर होगा। इसका मतलब है कि बोली लगाने वाले को कुछ शेयर जरूर मिलेंगे। एक्सपर्ट्स ने पॉलिसीहोल्डर्स को ज्यादा से ज्यादा शेयरों के लिए बोली लगाने की सलाह दी है। इसका मतलब है कि अगर आप पॉलिसीहोल्डर हैं और आपके पास पैसा है तो आप 2 लाख रुपये की लिमिट तक बोली लगा सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि चूंकि शेयरों का एलॉटमेंट आनुपातिक आधार पर होगा, इसलिए ज्यादा बोली लगाने वाले को ज्यादा शेयर एलॉट होने की उम्मीद है। इसलिए अगर आप ज्यादा शेयरों के लिए बोली लगाते हैं तो आप उस व्यक्ति के मुकाबले ज्यादा शेयर आवंटित होने की उम्मीद कर सकते हैं, जिसने सिर्फ एक लॉट के लिए बोली लगाई होगी।
रिटेल कैटेगरी में शेयरों का आवंटन ड्रॉ के जरिए होगा। इसका मतलब है कि सभी अप्लिकेशंस को शेयर एलॉट होने की गारंटी नहीं होगी। ड्रॉ में जिस अप्लिकेंट का नाम आएगा, कंपनी उसे शेयर एलॉट करेगी। जिन लोगों के नाम ड्रॉ में नहीं आएंगे, उनके पैसे वापस मिल जाएंगे।