NSE Co-Location Case: सेबी की एक एक्सटर्नल कमेटी ने सिफारिश की है कि अटके कानूनी विवादों के निपटारे के लिए ₹1800 करोड़ ($19.25 करोड़) का पेमेंट करे। यह सिफारिश दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव्स एक्सचेंज को बाजार नियामक SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के साथ लंबे समय चल रहे विवाद के समाधान के करीब ले आती है। बता दें कि गवर्नेंस में खामियों और सभी ट्रेडिंग मेंबर्स को एक जैसा एक्सेस नहीं देने के आरोपों के चलचे एनएसई का आईपीओ भी लगभग 10 वर्षों से टलता आ रहा है।
SEBI की कमेटी ने क्या की है सिफारिश?
सेबी की HPAC (हाई-पावर्ड एडवायजरी कमेटी) ने एनएसई के को-लोकेशन मामले में ₹1,800 करोड़ से अधिक के सेटलमेंट की सलाह दी है। सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है। जानकारी के मुताबिक कमेटी की इस सिफारिश पर अब सेबी के दो पूर्णकालिक सदस्यों की मंजूरी लेनी होगी। इन ₹1,800 करोड़ में से ₹1,200 करोड़ डिस्गॉर्जमेंट राशि हो सकती है, ₹400 करोड़ ब्याज के रूप में होंगे, जबकि शेष राशि समझौते की शर्तों के तहत तय की जाएगी। बता दें कि एनएसई ने पिछले साल 20 जून को सेबी के पास एक सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल किया था जिसमें उसने मामले को समाप्त करने के लिए ₹1,387.39 करोड़ की पेशकश की थी ताकि लंबे समय से अटकी लिस्टिंग का रास्ता साफ हो सके। इसमें से लगभग ₹600 करोड़ पहले ही एस्क्रो खाते में जमा किए जा चुके हैं। सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों ने बताया कि बाकी पैसे पेमेंट का फाइनल नोटिस आने पर जमा किया जाएगा।
क्या है NSE Co-Lacation Case?
एनएसई पर आरोप है कि इसने कुछ ब्रोकर्स को मार्केट से जुड़े डेटा को फटाफट तेज स्पीड और प्राथमिकता से उपलब्ध कराए जिससे ट्रेंडिंग में उन्हें अनुचित फायदा मिला। इस मामले से जुड़ी लंबी कानूनी प्रक्रिया के चलते एनएसई का आईपीओ लंबे समय तक अटका रहा। हालांकि पिछले साल एनएसई ने समझौते के लिए आवेदन किया जिसके बाद आईपीओ का रास्ता अब साफ हो गया है। एनएसई ने ₹1300 करोड़ से अधिक अमाउंट की पेशकश की थी और सेबी की कमेटी ने ₹1800 करोड़ से अधिक की बात कही है। सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सेबी जल्द ही एनएसई को पैसे जमा करने के लिए डिमांड लेटर जारी करेगा जिसके बाद फाइनल ऑर्डर जारी कर सेटलमेंट पूरा किया जाएगा।
IPO पर कहां तक पहुंचा है काम?
एनएसई ने पिछले महीने अपने आईपीओ को मैनेज करने के लिए 20 बैंकों को नियुक्त किया था जोकि भारत में किसी भी आईपीओ के लिए अब तक सबसे अधिक है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के रूप में एनएसई देश की सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनी भी है, जिसके लगभग 1.90 लाख निवेशक हैं। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक एनएसई ने आईपीओ को मैनेज करने के लिए जिन बैंकों को काम सौंपा है, उन्होंने इसके मौजूदा निवेशकों को आईपीओ के जरिए अपने शेयर बेचने के लिए आमंत्रित किया है, जिसके बारे में वे 27 अप्रैल तक बता सकते हैं।