NTPC Green Energy के IPO में निवेश का बना रहे हैं मन? पहले जान लें तमाम रिस्क फैक्टर्स

NTPC Green Energy का बिजनेस और प्रॉफिटेबिलिटी, मटेरियल, कंपोनेंट्स और इक्विपमेंट की उपलब्धता और लागत पर निर्भर है। कंपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए थर्ड पार्टी सप्लायर्स पर निर्भर है। कंपनी के पास अभी किसी भी मटेरियल, कंपोनेंट या इक्विपमेंट सप्लायर्स के साथ कोई लॉन्ग टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है

अपडेटेड Sep 19, 2024 पर 5:13 PM
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एनटीपीसी लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी ने आईपीओ के लिए अप्लाई कर दिया है।

NTPC Green Energy IPO: एनटीपीसी लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी ने आईपीओ के लिए अप्लाई कर दिया है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए 10000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार कंपनी केवल नए शेयर जारी करेगी और मौजूदा शेयरधारक कोई हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे। यह आईपीओ मई 2022 में लाइफ LIC के 21000 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

अगर आप इस एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के आईपीओ में निवेश का मन बना रहे हैं, तो पहले आपको इस कंपनी से जुड़ी तमाम जोखिमों के बारे में जान लेना चाहिए। कंपनी ने अपने DRHP में सभी रिस्क फैक्टर्स का खुलासा किया है।

NTPC Green Energy: रेवेन्यू के लिए कुछ ग्राहकों पर निर्भरता अधिक


एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2024 में अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा (87% से अधिक) टॉप पांच ऑफटेकर से प्राप्त करती है, जिसमें इसके सबसे बड़े ऑफटेकर का रेवेन्यू में योगदान वित्त वर्ष 24 में लगभग 50% है। इनमें से किसी भी ग्राहक के नहीं होने या उनकी वित्तीय स्थिति में गिरावट से बिजनेस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कंपनी ने कहा है कि वह वित्त वर्ष 25 के शेष समय के लिए रेवेन्यू के एक बड़े हिस्से के लिए टॉप नौ ऑफटेकर्स पर निर्भर रहेगी।

NTPC Green Energy की थर्ड पार्टी सप्लायर्स पर अधिक निर्भरता

बिजनेस और प्रॉफिटेबिलिटी मटेरियल, कंपोनेंट्स और इक्विपमेंट की उपलब्धता और लागत पर निर्भर है। कंपनी इन जरूरतों को पूरा करने के लिए थर्ड पार्टी सप्लायर्स पर निर्भर है। कंपनी के पास अभी किसी भी मटेरियल, कंपोनेंट या इक्विपमेंट सप्लायर्स के साथ कोई लॉन्ग टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। हालांकि, कंपनी सोलर मॉड्यूल, विंड टरबाइन जनरेटर और बैटरी स्टोरेज सिस्टम जैसे अहम कैपिटल एक्सपेंडिचर कंपोनेंट्स की सप्लाई के लिए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट कर सकती है।

NTPC Green Energy का बिजनेस राजस्थान में केंद्रित

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की ऑपरेटिंग रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स राजस्थान में केंद्रित हैं। राजस्थान में कोई भी बड़ी सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक या सीजनल दिक्कत और प्राकृतिक आपदाएं बिजनेस पर असर डाल सकती हैं।

PPA रिस्क

पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPA) बिजनेस को कुछ रिस्क में डाल सकते हैं। इसके अलावा, कंपनी का रेवेन्यू फिक्स्ड टैरिफ और टैरिफ रेगुलेशन और स्ट्रक्चरिंग में बदलाव के अधीन है। वर्तमान में कंपनी का 96 फीसदी रेवेन्यू रिन्यूएबल एनर्जी की बिक्री से आता है, जिसमें प्रॉफिटेबिलिटी काफी हद तक PPA के तहत इफेक्टिव कॉस्ट मैनेजमेंट पर निर्भर करती है।

NTPC Green Energy के लिए तगड़ा कंपटीशन

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी को ट्रेडिशनल और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों दोनों से कड़े कंपटीशन का सामना करना पड़ रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री मार्केट में होने वाले बदलावों को समझने में कोई भी गलती कंपनी के बिजनेस को प्रभावित कर सकती है। मुख्य कंपटीटर्स में सोलर प्रोजेक्ट्स, विंड प्रोजेक्ट्स और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी के इंडियन और इंटरनेशनल डेवलपर्स और ऑपरेटर शामिल हैं।

NTPC Green Energy के लिए ये भी हैं रिस्क

सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए इन-हाउस प्रोक्योरमेंट ऑपरेशन बिजनेस को कुछ रिस्क में डाल सकते हैं। अगर पावर प्रोजेक्ट्स में कंपोनेंट्स के सप्लायर अपनी वारंटी ऑब्लिगेशन पर डिफॉल्ट करते हैं, तो कंपनी को खर्च उठाना पड़ सकता है। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी सप्लायर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स से क्रेडिट और परफॉर्मेंस रिस्क के अधीन है।

सोलर इक्विपमेंट और विंड टरबाइन जनरेटर के आयात पर प्रतिबंध और अन्य फैक्टर सोलर इक्विपमेंट की कीमत या उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं, बिजनेस की लागत बढ़ा सकते हैं। कंपनी पर काफी कर्ज है और फाइनेंसिंग एग्रीमेंट्स में री-पेमेंट और अन्य शर्तों का पालन नहीं कर पाने की स्थिति में बिजनेस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ है। 30 जून 2024 तक कंपनी पर कुल बकाया उधार (करेंट बॉरोइंग और नॉन-करेंट बॉरोइंग सहित) ₹15277 करोड़ था।

अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी के रूप में कंपनी ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन केमिकल और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम सहित नए रिन्यूएबल एरिया में एंट्री करके रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने का इरादा रखती है। ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन केमिकल्स और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम जैसे नए क्षेत्रों का विकास और कमर्शियलाइजेशन जटिल, समय लेने वाला और महंगा है और इसमें उच्च स्तर का बिजनेस रिस्क है।

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