Ola Electric IPO: 27 जुलाई 2024, ओला इलेक्ट्रिक के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन गया। कंपनी ने अपने इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के प्राइस बैंड का ऐलान किया। भाविश अग्रवाल की अगुआई और सॉफ्टबैंक के निवेश वाली ओला इलेक्ट्रिक ने शुरुआती दिक्कतों के बावजूद देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी बनने में सफलता पाई। अब कंपनी का IPO 2 से 6 अगस्त के बीच रिटेल निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। इसके लिए 72 से 76 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है। यह देश की पहली प्योर इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी है, जो IPO के जरिए शेयर बाजार में लिस्ट होने जारी है। इस आईपीओ से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विस्तार, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कर्ज को चुकाने में किया जाएगा।
कब तक मुनाफे में आएगी कंपनी?
हालांकि, रिटेल निवेशकों को ओला के IPO में निवेश करने से पहले कई सवालों पर विचार करना चाहिए- कंपनी कब तक मुनाफे में आएगी? निवेश की जा रही राशि की वसूली कब तक होगी? और क्या सब्सिडी और बैटरी की लागत पर अनिश्चतता के बीच कंपनी की महत्वाकांक्षी योजनाएं पूरी हो पाएंगी?
EV Adoption: सरकार का अनुमान और हकीकत
पिछले एक दशक में, सरकार की नीतियों के कारण इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के दाम में सचमुच में कमी आई है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति ग्राहकों का रुझान भी बढ़ा है। लेकिन, क्या यह रुझान उतना तेज है जितना सरकार और कंपनियों ने अनुमान लगाया था? शायद नहीं। अभी दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का योगदान 6-7 प्रतिशत है। सरकार का अनुमान है कि 2030 तक देश के कुल दोपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का योगदान 60 से 70 प्रतिशत होगा। हालांकि एनालिस्ट्स को मुश्किल से इसके 20 से 25 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है।
Ola का वित्त वर्ष 2024 में बढ़ा घाटा
ओला का नेट लॉस वित्त वर्ष 2023 में 1,472 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर 1584 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके साथ ही, कंपनी की सरकारी सब्सिडी और इनसेंटिव्स पर निर्भरता है। अगर इनमें कोई बदलाव होता है तो कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, बजट 2024 में FAME III स्कीम के ऐलान की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बाजार में कॉम्पिटीशन भी हुआ तेज
इसके अलावा ओला इलेक्ट्रिक के मार्केट शेयर में भी कमी आई है, जो इस सेगमेंट में बढ़ते कॉम्पिटीशन को दिखाता है। हालांकि अभी भी यह मार्केट शेयर के मामले में बाकी कंपनियों से काफी आगे है। हालांकि TVS और दूसरी राइवल कंपनियों के आक्रामक रणनीतियों से ओला के मार्केट शेयर में और कमी आ सकती है।
निवेश के लिए क्या यह सही समय है?
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि ओला के पास इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए सबसे आधुनिक फैक्ट्री हैं और उसके प्रोडक्ट की क्वालिटी में सुधार हुआ है। उसकी नई लॉन्च होने वाली गाड़ियां भी बाजार में अपनी जगह बना सकती हैं। लेकिन, रिटेल निवेशकों के लिए यह अहम है कि वे इस आईपीओ में निवेश करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें।
कुल मिलाकर कंपनी का प्राइस बैंड निवेशकों को लुभा सकता है। लेकिन निवेशकों को साथ में इस पर भी विचार करना चाहिए कि कंपनी अभी तक फायदे में नहीं आई है और वह ऐसी इंडस्ट्री कारोबार कर रही है, जिसके नियम कायदे से अभी पक्के तौर पर नहीं बने हैं। ऐसे में निकट भविष्य में कंपनी को कुछ और चुनौतियां का भी सामना करना पड़ सकता है।