Rishabh Instruments IPO: ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स (Rishabh Instruments) का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए आज खुल गया है। इश्यू खुलने से पहले 16 एंकर निवेशकों से यह 147.23 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। एंकर निवेशकों को 441 रुपये के भाव पर 33,38,656 इक्विटी शेयर जारी हुए हैं। अब ग्रे मार्केट की बात करें तो इसके शेयर काफी मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से यह 83 रुपये यानी 18.82 फीसदी की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फाइनेंशियल्स और फंडामेंटल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेना चाहिए।
Rishabh Instruments IPO की डिटेल्स
ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स का 490.78 करोड़ रुपये का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 1 सितंबर तक खुला रहेगा। इस इश्यू के तहत 418-441 रुपये के प्राइस बैंड और 34 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। आईपीओ का आधा हिस्सा क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (QIB) के लिए, 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 6 सितंबर को फाइनल होगा। इश्यू का रजिस्ट्रार केफिन टेक है। इसके बाद शेयरों की बीएसई और एनएसई पर 11 सितंबर को एंट्री होगी।
आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 1,11,28,858 शेयर जारी होंगे। इसमें से 75 करोड़ रुपये के 17,00,680 नए शेयर जारी होंगे। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल नासिक में स्थित प्लांट के विस्तार और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा। नए शेयरों के अलावा आईपीओ के तहत बाकी 415.78 करोड़ रुपये के 94,28,178 शेयरों की ऑफर फॉर सेल (OFS) विंडो के तहत बिक्री होगी। ओएफएस विंडो के तहत प्रमोटर्स आशा नरेंद्र गोलिया, ऋषभ नरेंद्र गोलिया और नरेंद्र ऋषभ गोलिया (एचयूएफ) 24.17 लाख शेयरों की बिक्री करेंगे। वहीं ऑफर फॉर सेल के तहत साउथ एशियन क्लीन एनर्जी फंड की सब्सिडियरी SACEF Holdings II अपनी पूरी 19.33 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी।
निवेश को लेकर रिस्क क्या है
ऋषभ इंस्ट्रूमेंट्स कारोबार के लिए अपनी सब्सिडरीज पर बहुत निर्भर है और वित्त वर्ष 2023 में इसके रेवेन्यू में सब्सिडियरीज की 67.09 फीसदी हिस्सेदारी थी। रेवेन्यू से जुड़ा एक और रिस्क ये है कि इसका 66 फीसदी रेवेन्यू निर्यात से आता है तो फॉरेन एक्सचेंज और प्रोडक्ट्स की मांग में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ इकनॉमिक साइकिल से इसके कारोबार पर असर दिख सकता है। मैनुफैक्चरिंग की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 के आंकड़ों के हिसाब से पोलैंड मैनुफैक्चरिंग फैसिलिटी 2 की इसके मैनुफैक्चरिंग में 62.73 फीसदी हिस्सेदारी रही यानी अगर इसके शेड्यूल के हिसाब से प्रोडक्शन नहीं हुआ तो इसका कारोबार प्रभावित हो सकता है। कंपनी में निवेश को लेकर एक रिस्क ये भी है कि इसके अधिकतर ग्राहकों ने लॉन्ग टर्म कांट्रैक्ट नहीं किया और वे इसमें बदलाव भी कर सकते हैं। चिप की सप्लाई में दिक्कत होती है तो भी इसके कारोबार को झटका लग सकता है।
Rishabh Instruments के बारे में
यह कंपनी टेस्ट और मीजरिंग इंस्ट्रूमेंट्स और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट प्रोडक्ट्स बनाती है। 2011 में इसने यूरोप में एक नॉन-फेरस प्रेशर कास्टिंग कंपनी Lumel Alucast को खरीद लिया, जिससे कंपनी को कम वोल्टेज वाले करेंच ट्रांसफार्मर को बनाने में मदद मिली। इसका कारोबार चार सेगमेंट्स- इलेक्ट्रिकल ऑटोमेशन डिवाइसेज; मीटरिंग, कंट्रोल और प्रोटेक्शन डिवाइसेज; पोर्टेबल टेस्ट और मीजरिंग इंस्ट्रूमेंट्स; सोलर स्ट्रिंग इनवर्टर्स में फैला हुआ है।
इसके तीन मैनुफैक्चरिंग प्लांट हैं और दुनिया भर में 70 से अधिक देशों में 270 से अधिक डीलर्स हैं। देश भर में इसके 150 से अधिक डीलर्स हैं। इसके वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2023 में इसे 49.69 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जबकि एक वित्त वर्ष पहले भी लगभग इतना ही 49.65 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा मिला था। वित्त वर्ष 2020-21 में इसे 35.94 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हासिल हुआ था।