Crop Life Science IPO: खेतों के लिए जरूरी रसायन बनाने वाली गुजरात की कंपनी क्रॉप लाइफ साइंस का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। इस एसएमई कंपनी के शेयरों को लेकर ग्रे मार्केट में काफी सुस्त रुझान दिख रहा है। इश्यू के अपर प्राइस बैंड से यह महज 3 रुपये यानी 6 फीसदी की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फाइनेंशियल्स और फंडामेंटल्स के आधार पर निवेश का फैसला लेना चाहिए। ऐसे में यहां नीचे इश्यू से जुड़ी पूरी डिटेल्स के साथ-साथ कंपनी के कारोबार और इसकी स्ट्रेंथ और रिस्क के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।
Crop Life Science IPO की डिटेल्स
क्रॉप लाइफ साइंस के 26.73 करोड़ रुपये के आईपीओ में 22 अगस्त तक पैसे लगा सकेंगे। इस इश्यू के तहत 52 रुपये के भाव और 2 हजार शेयरों के लॉट में बोली लगा सकते हैं। खुदरा निवेशकों के लिए इसका आधा हिस्सा आरक्षित है। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का अलॉटमेंट 25 अगस्त को फाइनल होगा। इसकी रजिस्ट्रार पूर्व शेयररजिस्ट्री है। इसके बाद शेयरों की एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म NSE SME पर 30 अगस्त को एंट्री होगी। आईपीओ के जरिए कंपनी 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 51.40 लाख नए शेयर जारी करेगी। इन शेयरों को जारी कर जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और आईपीओ के खर्चों को भरने में करेगी।
Crop Life Science की डिटेल्स
क्रॉप लाइफ साइंस माइक्रो फर्टिलाइजर्स और पेस्टिसाइड्स जैसे एग्रोकेमिकल तैयार करती है। इसके पोर्टफोलियो में 85 से अधिक एग्रो-केमिकल प्रोडक्ट्स हैं। इसका मैनुफैक्चरिंग प्लांट गुजरात के जीआईडीसी अंकलेश्वर में स्थित है। इसके प्रोडक्ट्स की बिक्री न सिर्फ भारत में बल्कि इंडोनेशिया, बांग्लादेश, इजिप्ट, म्यामार, वियतनाम, सूडान समेत अन्य देशों में भी होती है। अब कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2020 में इसे 3.23 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था जो अगले ही वित्त वर्ष में बढ़कर 3.70 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि अगले ही वित्त वर्ष यह गिरकर 2.81 करोड़ रुपये पर आ गया लेकिन फिर वित्त वर्ष 2023 में 4.36 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
क्या है स्ट्रेंथ और रिस्क
पहले ताकत की बात करें तो क्रॉप लाइफ साइंस का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी बड़ा और डाइवर्सिफाईड है। इसके कीटनाशकों के 296 टेक्निकल फॉर्मूलों को मंजूरी मिल चुकी है। इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी काफी बड़ा है और कंपनी का दावा है कि अलग-अलग हिस्से में इसके करीब 1800 डिस्ट्रीब्यूटर्स और होलसेल आउटलेट हैं। एक और सबसे बड़ा पॉजिटिव कंपनी के साथ ये है कि इसका प्लांट ऐसी जगह पर है जहां रेलवे और नेशनल हाईवे की कनेक्टिविटी अच्छी है जिससे कच्चा माल और तैयार माल के ट्रांसपोर्ट में सुविधा हो जाती है।
अब निवेश से जुड़े रिस्क की बात करें तो ट्रेंडलाइन पर मौजूद डिटेल्स के मुताबिक कंपनी से जुड़े कुछ कानूनी मामले चल रहे हैं और ये मामले ऐसे हैं जिनसे कंपनी की वित्तीय सेहत पर भी असर पड़ सकता है। एक और अहम बात ये है कि कंपनी का जो कारोबार है, वह 12 महीने वाला नहीं है यानी कि मौसम की परिस्थितियों के हिसाब से इसके कारोबार में ऊंच-नीच हो सकता है। इसके अलावा यह अपने कारोबार के लिए कुछ ही ग्राहकों और सप्लॉयर पर निर्भर है यानी कि इनमें से कुछ ने भी कंपनी के साथ कारोबारी संबंध खत्म किए तो इसके रेवेन्यू को भारी झटका लगेगा।