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Tata Capital IPO: सितंबर 2025 तक लिस्टिंग की तैयारी, वैल्यूएशन और ओनरशिप समेत तमाम डिटेल

Tata Capital के अन-सिक्योर्ड क्रेडिटर्स 17 जनवरी 2025 को एक बैठक करेंगे, जिसमें दो नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) के विलय को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद, यह प्रस्ताव ट्रिब्यूनल को भेजा जाएगा, जो इस विलय को मंजूरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 28, 2024 पर 2:38 PM
Tata Capital IPO: सितंबर 2025 तक लिस्टिंग की तैयारी, वैल्यूएशन और ओनरशिप समेत तमाम डिटेल
Tata Capital IPO: टाटा ग्रुप की फाइनेंशियल सर्विसेज आर्म टाटा कैपिटल लिमिटेड अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है।

Tata Capital IPO: टाटा ग्रुप की फाइनेंशियल सर्विसेज आर्म टाटा कैपिटल लिमिटेड अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी 2025 में सितंबर के अंत तक भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है। टाटा संस की सब्सिडियरी कंपनी अगले साल की शुरुआत में टाटा मोटर फाइनेंस के साथ चल रहे विलय के पूरा होने के बाद अपनी फाइलिंग प्रक्रिया शुरू करेगी। विलय की प्रक्रिया नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, मुंबई में चल रही है।

टाटा कैपिटल के अन-सिक्योर्ड क्रेडिटर्स 17 जनवरी 2025 को एक बैठक करेंगे, जिसमें दो नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) के विलय को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद, यह प्रस्ताव ट्रिब्यूनल को भेजा जाएगा, जो इस विलय को मंजूरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। ऐसा अनुमान है कि इस विलय को वित्तीय वर्ष के अंत तक मंजूरी मिल जाएगी। विलय के बाद बनी हुई नई एंटिटी वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अपने IPO के लिए आवेदन कर सकती है। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लिस्ट होने की डेडलाइन को पूरा करने के लिए उठाया जाएगा।

टाटा कैपिटल अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े बिजनेस की होल्डिंग कंपनी है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक "सिस्टमैटिकली अहम, नॉन-डिपॉजिट टेकिंग, कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी" के रूप में रजिस्टर्ड है।

सितंबर 2022 में RBI ने टाटा कैपिटल को "अपर-लेयर सिस्टमैटिकली इंपोर्टेंट NBFC" के रूप में क्लासिंफाइड किया। इस क्लासिफिकेशन के तहत कंपनी को सख्त रेगुलेटरी नियमों का पालन करना होता है। इनमें तीन वर्षों के भीतर अनिवार्य रूप से शेयर बाजार में लिस्ट होना शामिल है। इसका मतलब है कि टाटा कैपिटल को सितंबर 2025 तक अपने शेयरों को पब्लिक (IPO) करना होगा, ताकि वह इस रेगुलेटरी जरूरत को पूरा कर सके।

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