टोरेंट गैस ने आईपीओ के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स फाइल कर दिए हैं। यह टोरेंट ग्रुप की कंपनी है, जो इंटिग्रेटेड सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन (सीजीडी) बिजनेस में है। कंपनी ने कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट के जरिए पेपर्स फाइल किए हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले कई लोगों ने मनीकंट्रोल को यह बताया।
लिस्ट होने वाली टोरेंट समूह की तीसरी कंपनी
लिस्टिंग के बाद Torrent Gas गुजरात की टोरेंट समूह की शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली तीसरी कंपनी हो जाएगी। इस ग्रुप की दो कंपनियां टोरेंट फार्मास्युटिकल्स और टोरेंट पावर पहले से शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। एक व्यक्ति ने बताया, "ड्राफ्ट पेपर्स सब्मिट कर दिए गए हैं। इसमें कोई प्राइमरी पोर्शन नहीं है और यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा।"
कई राज्यों में सीएनजी और पीएनजी बेचने का अथॉराइजेशन
एक दूसरे व्यक्ति ने बताया कि Axis Capital, Kotak Mahindra Capital और Citi बतौर इनवेस्टमेंट बैंक इस इश्यू पर काम कर रहे हैं। इस बारे में टोरेंट गैस को पहले भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, टोरेंट गैस के पास सीजीडी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) बेचने का अथॉराइजेशन है। कंपनी सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 34 जिलों में व्हीकल्स यूजर्स को सीएनजी बेचेगी और इंडस्ट्रीज और घरों को पीएनजी बेचेगी।
FY25 में कंपनी को 4,706 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट
टोरेंट गैस का रेवेन्यू FY25 में 45,638.2 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 4,706 करोड़ रुपये था। यह जानकारी Tracxn के डेटा पर आधारित है, जो एक प्राइवेट मार्केट डेटा प्रोवाइडर है। जिनल मेहता टोरेंट गैस के चेयरमैन हैं। मनोज जैन इसके मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। पहले से कई गैस कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं, जिनमें इंद्रप्रस्थ गैस, महानगर गैस, गुजरात गैस और अदाणी टोटल गैस शामिल हैं।
क्या है ड्राफ्ट पेपर्स फाइल करने का कॉन्फिडेंशियल रूट?
सेबी ने नवंबर 2022 में बड़ी कंपनियों के आईपीओ के लिए कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग रूट की शुरुआत की थी। इस रूट की खास बात यह है कि आईपीओ पेश करने वाली कंपनी को अपने बिजनेस से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां, बिजनेस डेटा और रिस्क को गुप्त खासकर प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से छुपाने की सुविधा मिलती है। दूसरा तरीका ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) का है, जिसमें सभी जानकारियां पब्लिक हो जाती हैं।
क्या हैं कॉन्फिडेंशियल रूट से पेपर्स फाइल करने के फायदे?
कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग रूट के इस्तेमाल में कंपनी को लिस्टिंग के बारे में अंतिम फैसला होने तक गोपनीयता बनाए रखने की सुविधा मिल जाती है। जरूरत पड़ने पर वह आईपीओ पेश करने का फैसला वापस ले सकती है। इस दौरान कंपनी के बिजनेस से जुड़ी प्रमुख जानकारियां पब्लिक नहीं होती हैं। टाटा कैपिटल, टाटा प्ले, ओयो, स्विगी, विशाल मेगा मार्ट, क्रेडिला फाइनेंशियल जैसी कंपनियों ने आईपीओ के लिए इसी रूट का इस्तेमाल किया था।