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11 राजनीतिक पार्टियों ने इलेक्टोरेल बॉन्ड खरीदने वालों के नाम और रकम का किया खुलासा

एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक डीएमके, एआईडीएमके, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, जनता दल (सेक्युलर), जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, महाराष्ट्रवादी गोमतक पार्टी, एमजीपी गोवा, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, एनसीपी, जनता दल (यूनाइटेड) ने बॉन्ड्स के जरिेय पैसा देने वालों के नाम जाहिर किए हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 17, 2024 पर 11:17 PM
11 राजनीतिक पार्टियों ने इलेक्टोरेल बॉन्ड खरीदने वालों के नाम और रकम का किया खुलासा
चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर 17 मार्च को कुछ और नई जानकारी जारी की है।

अब तक कुल 11 राजनीतिक पार्टियों ने अपने इलेक्टोरेल बॉन्ड के डोनर और संबंधित राशि के बारे में खुलासा किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाकी पार्टियों ने तारीख के हिसाब से उन इलेक्टोरल बॉन्ड्स की वैल्यू के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है, जो उन्होंने कैश कराया था। एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक डीएमके, एआईडीएमके, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, जनता दल (सेक्युलर), जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, महाराष्ट्रवादी गोमतक पार्टी, एमजीपी गोवा, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, एनसीपी, जनता दल (यूनाइटेड) ने बॉन्ड्स के जरिेय पैसा देने वालों के नाम जाहिर किए हैं।

इस खबर के मुताबिक, डीएमके को बॉन्ड के जरिये पैसे देने वालों में फ्यूचर गेमिंग एंड सर्विसेज और मेघा इंजीनियरिंग शामिल हैं। एआईडीएमके को कुल 6.05 करोड़ रुपये मिले, जिसमें 5 करोड़ रुपये चेन्नई सुपर किंग्स ने दिए हैं। जनता दल (सेक्युलर) को MEIL से 50 करोड़ रुपये मिले। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस को एलेम्बिक फार्मा से 50 लाख रुपये मिले हैं। इसके अलावा, एमजीपी गोवा को वीएम सलगांवकर से 55 लाख रुपये मिले।

सैन बेवरेजेज, एसके ट्रेडर्स और बीएस ट्रेडर्स समाजवादी पार्टी के लिए फंड मुहैया कराने का प्रमुख स्रोत रहे हैं। जनता दल (यूनाइटेड) को बॉन्ड के जरिये फंड उपलब्ध कराने वाली कंपनियों में भारती एयरटेल और श्रीसीमेंट शामिल हैं। इसी तरह, आम आदमी पार्टी को बजाज ग्रुप (Bajaj Group) से 3 करोड़ रुपये और टॉरेंट फार्मास्युटिकल्स (Torrent Pharmaceuticals) से 1 करोड़ रुपये मिले हैं।

चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर 17 मार्च को कुछ और नई जानकारी जारी की है। इसमें राजनीतिक पार्टियों द्वारा हासिल की गई रकम के बारे में जानकारी पेश की गई है। यह डेटा सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से डिजिटल फॉर्मैट में हासिल कर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। आयोग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम ऑर्डर के मुताबिक चुनाव आयोग ने सीलबंद लिफाफे में जानकारी सौंपी है। यह ब्यौरा 12 अप्रैल 2019 से पहले का है।

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