Assam Opinion Poll 2026: ओपिनियन पोल में असम में BJP की प्रचंड वापसी, कांग्रेस को करारा झटका लगने की भविष्यवाणी

Assam Opinion Poll 2026: असम विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही चुनावी मैदान में उतरने वाली पार्टियां अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने के लिए कमर कसने लगी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपनी ताकत पर भरोसा है। ओपिनियन पोल की मानें तो असम में बीजेपी फिर से सत्ता में आ रही है

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 2:10 PM
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Assam Opinion Poll 2026: असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे

Assam Opinion Poll 2026: असम विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राज्य में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। जबकि, चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA)अपने शासन के रिकॉर्ड और संगठनात्मक ताकत के भरोसे उतरेगा। इस बीच, तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही BJP के लिए एक गुड न्यूज है।

असम विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद आईएएनएस-मैटराइज का ओपिनियन पोल सामने आया है। Matrize-IANS के ओपिनियन पोल के मुताबिक, असम में एक बार फिर से कमल खिलने का अनुमान लगाया गया है। जबकि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पर प्रदेश की जनता ने भरोसा नहीं जताया है। इस पोल के मुताबिक, असम में BJP प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हो सकती है।

ओपिनियन पोल के अनुसार, असम की 126 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन को 96-98 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, कांग्रेस गठबंधन को 26 से 28 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा अन्य के खाते में 2 से 8 सीटें आ सकती हैं। वोट शेयर पर नजर डालें तो ओपिनियन पोल के अनुसार, एनडीए को 43 से 44 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है। जबकि कांग्रेस गठबंधन को 39-40 प्रतिशत और अन्य को 18-20 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान लगाया गया है।


विधानसभा की वर्तमान स्थिति

15वीं असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इससे पहले चुनाव संपन्न कराना अनिवार्य है। असम में कुल 2.5 करोड़ वोट है। इनमें 1.25 करोड़ पुरुष और 1.25 करोड़ महिला मतदाता हैं। वहीं, थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 343 है। अगर फर्स्ट-टाइम वोटर्स (18-19 साल) की बात करें तो उनकी संख्या 5.75 लाख है।

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में BJP के 64 विधायक हैं। जबकि उसकी सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) के 9 और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के सात विधायक हैं। बोडो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के तीन विधायक हैं।

विपक्ष में कांग्रेस के 26 विधायक हैं। जबकि ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के 15 सदस्य हैं। इसके अलावा एक विधायक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का है और एक निर्दलीय सदस्य भी विधानसभा में है।

असम के प्रमुख मुद्दे

- घुसपैठ राज्य में यह मुद्दा दशकों से राजनीति के केंद्र में रहा है। इसी के चलते असम आंदोलन हुआ था। बाद में असम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। बीजेपी सरकार का दावा है कि उसने इस समझौते के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। घुसपैठ के मुद्दे को विपक्षी दल भी जोर-शोर से उठा रहा है। उसका आरोप है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजने की कार्रवाई के नाम पर असली भारतीय नागरिकों को ही निशाना बनाया है।

कांग्रेस और उसके सहयोगी दल विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बना रहे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता बहुसंख्यक हैं। घुसपैठ से जुड़े दो प्रमुख मुद्दे-राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का अद्यतन और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) भी चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र में रहने की संभावना है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि CAA का विरोध निराधार है, क्योंकि बांग्लादेश से आए बहुत कम हिंदुओं ने ही नागरिकता के लिए आवेदन किया है।

- बेदखली अभियान राज्य सरकार की कथित अतिक्रमणकारियों को हटाने की नीति भी चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनने जा रही है। इनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों की बताई जाती है, जिसे लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में हैं।

- सत्तारूढ़ गठबंधन का दावा है कि उसने अतिक्रमण हटाते हुए जंगलों, मंदिरों और अन्य सरकारी जमीन को वापस हासिल किया है। वहीं, विपक्ष इसे गंभीर मानवीय संकट बताते हुए आरोप लगा रहा है कि इस कार्रवाई में घरों को ढहाए जाने से कई लोग बेघर होकर सड़कों पर रहने को मजबूर हो गए और अनेक परिवारों की आजीविका भी छिन गई।

- बाल विवाह के खिलाफ राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई और बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी भी आगामी चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन सकती है। कई मामलों में आरोपियों पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन इसे सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है। जबकि विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि इस कार्रवाई के जरिए राज्य में एक बार फिर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है।

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- लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग की सितंबर 2025 में सिंगापुर में हुई मौत और इस मामले में न्याय की मांग भी चुनावी चर्चा का अहम मुद्दा बन सकती है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार इस मामले में न्याय दिलाने को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। आरोपियों को गिरफ्तार किया। अब मामला अदालत में विचाराधीन है।

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