West Bengal Elections 2026: न कोई बड़ा स्टार और न ही दलबदलू...'; बंगाल चुनाव के लिए BJP की पहली लिस्ट में क्या है खास?

West Bengal Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 144 कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट में कई जाने-माने नाम शामिल हैं। भगवा पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट कोलकाता के भबानीपुर से नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को चुनावी मैदान में उतारा है

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 12:32 PM
Story continues below Advertisement
West Bengal Assembly Elections 2026: बीजेपी ने बंगाल चुनाव के लिए 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है

West Bengal Assembly Elections 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए 144 उम्मीदवारों की अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। भगवा पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सीट कोलकाता के भबानीपुर से नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को चुनावी मैदान में उतारा है। सुवेंदु अपनी मौजूदा सीट नंदीग्राम से भी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। दिल्ली में बीजेपी की तरफ से की गई इस घोषणा से संकेत मिलता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी के इर्द-गिर्द चुनावी विमर्श को गढ़ने का प्रयास करेगी। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे।

बीजेपी की पहली लिस्ट में नंदीग्राम और भबानीपुर दोनों से सुवेंदु अधिकारी की उम्मीदवारी को सबसे महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। नंदीग्राम का इस मायने में राजनीतिक महत्व है कि 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का यह केंद्र था। इसी आंदोलन ने बनर्जी के सत्ता में आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन 2021 में यह सबसे नाटकीय चुनावी लड़ाइयों का भी तब गवाह बना जब अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनर्जी को लगभग 1,900 मतों से हरा दिया।

उधर, भबानीपुर को बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। वह 2021 में इस सीट से 58,000 से अधिक मतों के अंतर से उपचुनाव के बाद विधानसभा लौटी थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय बीजेपी की तटीय बंगाल और जंगल महल क्षेत्र में अधिकारी के संगठनात्मक नेटवर्क पर निर्भरता का भी संकेत देता है, जहां उनका काफी प्रभाव माना जाता है।


संगठनात्मक स्थिरता को प्राथमिकता

पहली लिस्ट में BJP की संगठनात्मक स्थिरता को प्राथमिकता देने का संकेत भी मिलता है। बीजेपी की पहली लिस्ट में 41 मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट दिया गया है। इनमें आसनसोल दक्षिण से अग्निमित्र पॉल, साल्टोरा से चंदना बाउरी और डबग्राम-फुलबाड़ी से शिखा चटर्जी शामिल हैं। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष एक बार फिर खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ेंगे। जबकि पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता को दक्षिण कोलकाता की रासबिहारी सीट से मैदान में उतारा गया है।

बीरभूम के सिउड़ी से भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। जबकि मुर्शिदाबाद जिले में दोनों मौजूदा विधायक सुब्रत मैत्रा (बहरमपुर) और गोरीशंकर घोष (मुर्शिदाबाद) को उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि, पहली लिस्ट में कुछ बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं क्योंकि सात मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया गया है।

युवाओं पर जताया भरोसा

केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा घोषित पहली लिस्ट में दो पूर्व सांसद और तीन पूर्व विधायक हैं। पार्टी ने 11 महिलाओं को भी टिकट दिया है। BJP ने युवाओं पर भरोसा जताते हुए 36 सीटों पर 40 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इसी प्रकार, 72 उम्मीदवारों की उम्र 41 से 55 वर्ष के बीच है। जबकि 32 उम्मीदवार 56 से 70 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। चार उम्मीदवार 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक यह लिस्ट सामाजिक विविधता को दर्शाने का एक सुनियोजित प्रयास है। इसमें BJP ने विभिन्न व्यावसायिक पृष्ठभूमियों से आने वाले उम्मीदवारों को प्रमुखता दी है। पार्टी के 144 उम्मीदवारों में 57 शिक्षण, वकालत, डॉक्टर, सामाजिक कार्य और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों से हैं। पार्टी ने सबसे अधिक 23 शिक्षकों को उम्मीदवार बनाया है।

इसके अलावा वकीलों, डॉक्टरों, रिटायर सैन्य कर्मियों, पत्रकारों और अभिनेता रुद्रनील घोष जैसे सांस्कृतिक हस्तियों को भी BJP उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा को मोयना से दोबारा मौका दिया गया है। वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार से संबंधित सौमित्र चट्टोपाध्याय को नैहाटी से BJP उम्मीदवार बनाया गया है।

स्टार और दलबदलू को तरजीह नहीं

BJP ने पहली लिस्ट में जान-बूझकर अपने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं पर जोर दिया है। इस बार पार्टी ने फिल्मी सितारों या पाला बदलने वाले नेताओं को टिकट देने से काफी हद तक परहेज किया है। यह 2021 की स्थिति को दोहराने से बचने की एक साफ कोशिश है, जब पार्टी की हार के तुरंत बाद कई दलबदलुओं ने पार्टी से किनारा कर लिया था।

ये भी पढ़ें- Keralam Fire: तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के ICU में लगी आग, सभी मरीजों को सुरक्षित निकाला गया

इस लिस्ट का एक और अहम पहलू यह है कि इसमें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबके से आने वाले उम्मीदवारों को जगह दी गई है। भगवा पार्टी ने दिग्गज नेताओं को नजरअंदाज किया है। टिकट पाने वालों में से कई लोग लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ता हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।