Bihar Loksabha Chunav: राम विलास पासवान 2.0 बनने की राह पर हैं चिराग पासवान? पार्टी और रिश्ते दोनों को संभालने की जिम्मेदारी

Bihar Loksabha Chunav: 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, चिराग के बिहार में दलित वोट जुटाने पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है। अपने चतुर चाचा पशुपति पारस के साथ उनका विवाद सबके सामने आने के कारण खबर बन गई। भारत के राजनीतिक इतिहास में चाचा-भतीजा के रिश्तों में तनाव रहे है

अपडेटेड Apr 06, 2024 पर 8:56 PM
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Bihar Loksabha Chunav: राम विलास पासवान 2.0 बनने की राह पर हैं चिराग पासवान?

Bihar Loksabha Chunav: चिराग पासवान (Chirag Paswan) कुछ कारणों से मायने रखते हैं। वह बिहार के एक शक्तिशाली दलित नेता राम विलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के बेटे हैं, जिन्हें अपने जीवनकाल में भारतीय राजनीति के महान उत्तरजीवी के रूप में जाना जाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने हाल ही में चिराग को अपना "छोटा भाई" कहा था। ये एक युवा नेता के लिए एक बड़ा समर्थन है। वह एक असफल अभिनेता हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके पास एक राजनीतिक विरासत है।

2024 के आम चुनावों से पहले, चिराग के बिहार में दलित वोट जुटाने पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है। अपने चतुर चाचा पशुपति पारस के साथ उनका विवाद सबके सामने आने के कारण खबर बन गई। भारत के राजनीतिक इतिहास में चाचा-भतीजा के रिश्तों में तनाव रहे है।

भारतीय राजनीति में, चाचाओं और उनके भतीजों के बीच संबंध बिगड़ने के कई उदाहरण हैं: बालासाहेब बनाम राज ठाकरे; शरद पवार बनाम अजित पवार; शिवपाल यादव बनाम अखिलेश यादव; और अभय चौटाला बनाम दुष्यन्त चौटाला।


राजनीतिक तौर पर चिराग का NDA को कई वजहों से फायदा हो सकता है:

- ज्यादातर लोकसभा सीटों पर कम से कम 10-15 हजार SC वोट हैं।

- ये मुख्य रूप से पासवान वोटर हैं।

- पासवान आक्रामक तरीके से मतदान करते हैं और वे मतदान करने वाली आबादी का 5-6 प्रतिशत हिस्सा हैं।

इसीलिए NDA ने जो गठबंधन बनाया है, उसमें वह बिल्कुल फिट बैठते हैं। आइए उनकी प्रासंगिकता का आकलन करने के लिए कुछ आंकड़ों पर एक नजर डालें। बिहार सरकार ने 2 अक्टूबर 2023 को जाति सर्वे डेटा जारी किया, जिसमें पाया गया कि बिहार की 63.1 प्रतिशत आबादी OBC है। इससे काफी बहस छिड़ गई।

- बड़ी जातियों के लिए अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बढ़ती मांग।

- आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा हटाने पर जोर।

- बिहार के विधायकों और सांसदों की जाति की पहचान राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

- मुस्लिम-यादव वर्ग 32 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख कारक बना हुआ है।

- यादव आबादी का 14.3 प्रतिशत हैं, जो 1931 में 12.7 प्रतिशत थे। कुर्मी 3.3 प्रतिशत से घटकर 2.9 प्रतिशत और कुशवाह 5 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत हो गए हैं।

- विपक्षी "महागठबंधन" का लक्ष्य OBC, SC और ST के लिए कोटा बढ़ाने के लिए जाति जनगणना का इस्तेमाल करना है।

कहां फिट बैठते हैं चिराग और नीतीश?

NDA ने पिछले लोकसभा चुनाव में ऊंची जातियों, OBC और दलितों का एक मजबूत सामाजिक गठबंधन बनाकर जीत हासिल की थी। यहीं पर चिराग और नीतीश कुमार फिट बैठते हैं।

नेशनल इलेक्शन स्टडीज पोस्ट-पोल सर्वे के डेटा से संकेत मिलता है कि UPA 2019 में अपने पारंपरिक मतदाता आधार पर अपनी पकड़ खो रहा है।

UPA के लिए यादव समुदाय का समर्थन 65 प्रतिशत से गिरकर 44 प्रतिशत हो गया, जिसमें एक महत्वपूर्ण गिरावट आई। उपेंद्र कुस्वाहा, मुकेश सहनी और जीतन राम मांझी जैसे नेताओं को शामिल करने के बावजूद यूपीए को दलितों और गैर-यादव OBC मतदाताओं के बीच भी झटका लगा।

चिराग पासवान का सफरनामा

चिराग अपने पिता की पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में शामिल हो गए, और वह जल्द ही लोकसभा के लिए चुने गए। 2020 के विधानसभा चुनाव 2 कारणों से चिराग के लिए पहली असली परीक्षा थे: पहला वो अपने पिता के बिना पहली बार अकेले चुनाव लड़ रहे थे, और दूसरा, बिहार में एनडीए गठबंधन से बाहर निकलने के बाद LJP अपने दम पर थी।

यह कदम सफल रहा, LJP ने जिन सात सीटों पर चुनाव लड़ा उनमें से छह पर जीत हासिल की और BJP के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। 2019 में चिराग को LJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।

2013 में दिल की बीमारी का पता चलने पर, राम विलास ने अपने बेटे को सत्ता सौंप दी। चिराग ने NDA में शामिल होकर 2014 और 2019 दोनों चुनावों में जीत हासिल की।

जब LJP के हुए दो फाड़

2022 में LJP में विभाजन के बाद चिराग की राजनीतिक संभावनाएं कमजोर हो गईं, जब उनके चाचा पशुपति ने LJP से अलग होकर अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी बना ली।

2024 में मुकाबला NDA और बिहार के महागठबंधन के बीच है। चिराग हाजीपुर से NDA के उम्मीदवार हैं और परिवार की राजनीतिक विरासत को बचाने की जिम्मेदारी इस बार उनके कंधे पर है। उनके साथ चाचा भी नहीं है।

हाजीपुर में लगभग 19.5 लाख मतदाता हैं, जिनमें 10.22 लाख पुरुष और 9.26 महिलाएं शामिल हैं। जहां तक ​​जातीय समीकरण की बात है, तो हाजीपुर में करीब 3 लाख पासवान मतदाता हैं, यहां यादव और राजपूत समुदायों के भी 3-3 लाख वोटर हैं।

चाचा-भतीजे को साथ लाना चाहती ही BJP

BJP का विचार रहा है कि चाचा-भतीजे को ''एक साथ आना'' चाहिए। यह आसान नहीं हो सकता है, क्योंकि चिराग का कहना है कि पारस "परिवार और पार्टी में विभाजन पैदा करने वाले" थे। इसलिए पहल वो करेंगे।

चिराग को एक "युवा नेता" के रूप में पेश किया जा रहा है, जो राजनीतिक रूप से तब तक जिंदा रहेगा और फलता-फूलता रहेगा, जब तक वो किसी बड़े दल के साथ जुड़ा रहेगा। क्या यह राम विलास पासवान 2.0 जैसा नहीं लगता?

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