Budaun Lok Sabha Saeat: सपा ने 60 दिनों में दूसरी बार बदला उम्मीदवार, शिवपाल यादव ने बेटे के लिए तैयार किया मैदान
Budaun Lok Sabha Saeat: 'परिवारवाद' के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ सपा नेता ने कहा, "परिवार की कमाई परिवार में ही बटती है।" पिता-पुत्र की जोड़ी मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पिछले कुछ दिनों से दोनों को बदायूं जिले के ग्रामीण इलाकों में ग्राम चौपाल करते देखा गया था
MoneyControl News
अपडेटेड Apr 16, 2024 पर 8:14 AM
Budaun Lok Sabha Saeat: सपा ने 60 दिनों में दूसरी बार बदला उम्मीदवार, शिवपाल यादव ने बेटे के लिए तैयार किया मैदान
Budaun Lok Sabha Saeat: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश की राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील लोकसभा सीटों में से एक, बदायूं से 60 दिनों में दूसरी बार अपना उम्मीदवार बदल दिया। अब की बार वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव के नाम की घोषणा की गई। इस पर BJP ने 'परिवारवाद' करने और केवल परिवार के लिए ही चुनाव लड़ने के जरिए अखिलेश यादव की पार्टी पर निशाना साधा। हालांकि, शिवपाल यादव ने कहा कि उनके बेटे का नाम स्थानीय पार्टी इकाई की तरफ से रखा गया था और वो भी सोचते हैं कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए।
पिछले 60 दिनों में यह दूसरी बार है, जब सपा ने बदायूं से अपना उम्मीदवार बदला है। शुरुआत में, पार्टी ने पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में, अखिलेश यादव ने उनकी जगह अपने चाचा और जसवन्त नगर से विधायक शिवपाल यादव को इस सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। उन्होंने ऐलान किया कि धर्मेंद्र आजमगढ़ सीट से चुनाव लड़ेंगे।
2 अप्रैल को, एक कार्यकर्ता सम्मेलन में, शिवपाल और धर्मेंद्र की मौजूदगी में, पार्टी के स्थानीय नेताओं ने बदायूं के उम्मीदवार के रूप में आदित्य के पक्ष में एक प्रस्ताव पारित किया।
शिवपाल ने सम्मेलन के बाद कहा, “यहां (बदायूं में) कार्यकर्ता सम्मेलन ने आज (आदित्य को उम्मीदवार बनाने का) प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव अब राष्ट्रीय नेतृत्व के पास जाएगा...जिससे मंजूरी मिलने की संभावना है।"
सपा की क्या था प्लानिंग?
सम्मेलन से पहले ही, शिवपाल ने अखिलेश को बता दिया था कि वो अपने बेटे को उस सीट से चुनाव लड़ाना पसंद करेंगे, जो उनके लिए लॉन्चपैड के रूप में भी काम करेगा।
News18 के मुताबिक, सपा के कुछ अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि पार्टी की मूल योजना यही थी कि अगर शिवपाल बदायूं लोकसभा सीट जीतते हैं, तो जसवंत नगर विधानसभा उपचुनाव के लिए आदित्य को उतारा जाएगा, लेकिन, शिवपाल का इरादा जसवन्त नगर विधायक बने रहने का है, जहां से वह 1996 से लगातार सात बार जीतते आए हैं।
बदायूं में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) के तीसरे चरण में 7 मई को मतदान होगा। नामांकन प्रक्रिया 12 अप्रैल से शुरू हुई और 19 अप्रैल को खत्म होगी।
आदित्य यादव का नाम क्यों रखा गया?
एक मुलाकात में शिवपाल ने मीडिया से कहा कि अखिलेश ने पहली बार 26 साल की उम्र में चुनाव लड़ा था, जबकि धर्मेंद्र ने 28 साल की उम्र में पहली बार चुनाव लड़ा था। वो भी सोचते हैं कि युवाओं को मौका मिलना चाहिए और इसलिए उन्होंने अपने बेटे का नाम आगे रखा।
'परिवारवाद' के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ सपा नेता ने कहा, "परिवार की कमाई परिवार में ही बटती है।" पिता-पुत्र की जोड़ी मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पिछले कुछ दिनों से दोनों को बदायूं जिले के ग्रामीण इलाकों में ग्राम चौपाल करते देखा गया था।
कौन हैं आदित्य यादव?
35 साल की उम्र में, आदित्य यादव, यादव परिवार से चुनावी राजनीति में सबसे नया चेहरा हैं। चुनाव लड़ने वाले इसी परिवार के दूसरे सदस्यों में मैनपुरी से डिंपल यादव, आज़मगढ़ से धर्मेंद्र और फिरोजाबाद से अक्षय यादव भी शामिल हैं।
सपा ने अभी तक कन्नौज लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है। चर्चा अखिलेश और पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
आदित्य इंडियन फार्म फॉरेस्ट्री कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFDC) और इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस के ग्लोबल बोर्ड में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पदों पर हैं, जो सहकारी और कृषि क्षेत्रों में उनकी भागीदारी को दर्शाता है।
बीजेपी ने क्या कहा?
बीजेपी ने अखिलेश की आलोचना की और इस कृत्य को 'परिवारवाद' का उदाहरण बताया। पार्टी प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, “सपा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो सिर्फ ‘परिवार’ के लिए लोकसभा चुनाव लड़ रही है। और बदायूं सीट से शिवपाल या आदित्य का नामांकन इसका एक और उदाहरण है।”
उन्होंने कहा कि बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो जीतने और देश की सेवा करने के लक्ष्य के साथ चुनाव लड़ रही है, लेकिन सपा 'परिवार' की खातिर चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए लड़ रही है। और BSP यह संदेश देने के लिए चुनावी मैदान में है कि उसका अस्तित्व अभी भी है।
बदायूं लोक सभा सीट के बारे में जानें
बीजेपी ने बदायूं सीट से दुर्विजय सिंह शाक्य को उम्मीदवार बनाया है। सपा ने आदित्य यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है। बदायूं लोकसभा क्षेत्र में जिले के पांच विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
2019 के चुनाव में बीजेपी की डॉ. संघमित्रा मौर्य 5,11,352 वोटों के साथ विजयी रहीं, उन्होंने धर्मेंद्र को 18,384 वोटों के अंतर से हराया। हालांकि, उससे पहले 2014 के चुनावों में, धर्मेंद्र ने 4,98,378 वोटों के साथ ये सीट हासिल की और BJP के वागीश पाठक को 1,66,201 वोटों के बड़े अंतर से हराया।