सुअर बेचकर बहू को भरवाया लोकसभा चुनाव का पर्चा, पिछले 23 साल से खुद भी लड़ रहे सभी चुनाव, मायाराम नट की अनोखी कहानी

Chhattisgarh Lok sabha election 2024: मायाराम नट ने बताया कि वह साल 2,000 से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा। फिर, 2009 में लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा। इसके बाद 2013 और 2018 में में जांजगीर चांपा विधानसभा से भी चुनाव लड़ा

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 4:45 PM
Chhattisgarh Lok sabha election 2024: मायाराम नट ने सुअर बेचकर नामांकन पत्र खरीदा है

Chhattisgarh Lok sabha election 2024: देश में 18वीं लोकसभा के लिए 19 अप्रैल से 7 चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण के मतदान के लिए आज यानी बुधवार (17 अप्रैल) शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा। पहले चरण में 21 राज्यों की 102 लोकसभा सीटो पर 19 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इस बीच, छत्तीसगढ़ की जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट से एक उम्मीदवार चर्चा का विषय बना हुआ है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बता रहे हैं, जो सभी चुनाव लड़ता है। वह पिछले 23 सालों से अपना लक अजमा रहे हैं। वह अपने खून पसीने की कमाई (पालतू सुअर बेचकर) लगाकर दांव अजमाता है।

जी हां, लोकसभा सीट के लिए हर बार सभी चुनाव लड़ने वाले मायाराम नट (Mayaram Natt) ने सुअर बेचकर नामांकन पत्र खरीदा है। जांजगीर चांपा जिले के महंत गांव के रहने वाले मायाराम नट ने इस बार लोकसभा चुनाव में अपनी बहू को चुनाव मैदान में उतारा है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है।

23 साल से लड़ रहे लोकसभा चुनाव


मायाराम नट ने बताया कि वह साल 2,000 से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा। फिर, 2009 में लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा। इसके बाद 2013 और 2018 में में जांजगीर चांपा विधानसभा से चुनाव लड़ा। उन्होंने अपनी पत्नी को जिला पंचायत चुनाव में खड़े किए। अपने बड़ी बहू को जनपद सदस्य क्षेत्र क्रमांक 05 से चुनाव लड़वाया, जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई और जनपद सदस्य चुनी गईं। 2023 के विधनसभा चुनाव में पामगढ़ विधनसभा चुनाव के लिए खुद खड़े हुए थे। उन्होंने दोहा बोलते हुए बताया, "बांस ले पेड़ में बांस ही होना चाहिए।" इसलिए कोई दूसरा नहीं अपने कॉलेज पढ़ी बहू के अब लोकसभा 2024 के लिए प्रत्याशी बनाकर चुनाव के लिए नामांकन फ्रॉम भरा है।

चुनाव के कारण बेचने पड़े सुअर

मायाराम नट ने बताया कि नामांकन फार्म की राशि के लिए वह हर बार अपने घर में पाले सुअर (PIG) को बेचते हैं। शुरूआत में उनके पास 110 नग सुअर थे जो वर्तमान में 45 नग बचे हुए हैं। बाकी सब चुनाव के कारण बिक गए हैं। अभी भी अपने बहु को लोकसभा चुनाव प्रत्याशी बनाने के लिए नामांकन फ्रॉम भरने के लिए वह 10 नग सुअर के बच्चे को 50 हजार में बेचे हैं। प्रचार के बारे में बताया कि वह नट प्रजाति जो डांग (रस्सी ) से करतब दिखाते हैं। वहीं डांस दिखाकर वह प्रचार करते हैं। इसके साथ ही मायाराम नट खुद ही स्वयं माइक से बोलकर प्रचार करते हैं। वह कोई रेडियो या रिकॉर्डेड गाना नहीं बजाते हैं।

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घर-घर जाकर करेंगे प्रचार

मायाराम की बहू विजयलक्ष्मी ने बताया कि जैसे व्यवस्था होगी, वैसे ही चुनाव लडेंगे। इसके लिए वह घर में सुअर पालन किए थे। उसमे से 10 नग बेचे हैं। उसी के पैसे से वह घर-घर जाकर प्रचार करेंगे और वोट मांगेंगे। गाड़ी का खर्च वहन नहीं कर सकते क्योंकि पेट्रोल बहुत ही ज्यादा महंगा है। उन्होंने कहा कि उनके ससूर जी (मायाराम) विगत कई वर्षों से चुनाव लड़ रहे है। सभी वर्गो के हक और उनका अधिकार के लिए वह चुनाव लड़ रहे है। अपने ससूर के बारे में कहा कि हर मां-बाप का फर्ज होता है कि वह अपने बच्चों के लिए सपना देखे और आज मेरे ससूर मुझे बहू नहीं, बल्कि अपनी बेटी के रूप में मुझे मार्गदर्शन दे रहे हैं।

(रिपोर्ट- लखेश्वर यादव)

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