Delhi Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव के बीच दिल्ली में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। शीला दीक्षित सरकार में करीब 15 साल तक मंत्री रहे राजकुमार चौहान (Raj Kumar Chauhan Resigns) ने पार्टी छोड़ दी है। सूत्रों के मुताबिक, वह उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट से उदित राज की उम्मीदवारी से नाराज थे। उदित राज भारतीय जनता पार्टी (BJP) से आए हैं जिन्होंने 2014 के आम चुनाव में भगवा टिकट पर सीट जीती थी। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद वह कांग्रेस में चले गए।
बता दें कि इस वक्त देश के अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता बीजेपी ज्वाइन कर रहे है। बताया जा रहा है राजकुमार उत्तर पश्चिमी दिल्ली से टिकट के दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने से वे नाराज हो गए। उन्होंने प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया के व्यवहार को इस्तीफे का मुख्य कारण बताया है। कांग्रेस ने उत्तर पश्चिमी दिल्ली से उदित राज को चुनावी मैदान में उतारा है।
उदित राज के खिलाफ प्रदर्शन
सबसे पुरानी पार्टी ने सोमवार को दिल्ली के लिए तीन लोकसभा उम्मीदवारों का परिचय देने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। हालांकि, यह कार्यक्रम पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के कारण बाधित हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उदित राज के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने राज को "बाहरी व्यक्ति" करार दिया। बीजेपी से आए उदित राज को कांग्रेस ने उत्तर पश्चिम दिल्ली से उम्मीदवार बनाया है।
दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर पार्टी की दिल्ली इकाई मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों चांदनी चौक से जे.पी. अग्रवाल और उत्तर पूर्वी दिल्ली से कन्हैया कुमार और उत्तर पश्चिम दिल्ली से उदित राज का परिचय दिया। कांग्रेस राष्ट्रीय राजधानी में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ रही है, जो चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
कन्हैया कुमार को भी बताया 'बाहरी'
हालांकि पार्टी कार्यकर्ताओं ने कन्हैया कुमार के खिलाफ नारे नहीं लगाए, लेकिन उनमें से कुछ ने उन्हें भी "बाहरी व्यक्ति" कहा। बता दें कि उन्होंने 2021 में सबसे पुरानी पार्टी में शामिल होने से पहले बिहार के बेगुसराय से CPI के टिकट पर 2019 का चुनाव लड़ा था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उदित राज ने कहा कि उत्तर पश्चिम दिल्ली के सांसद के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए कई कार्यों को पिछले पांच वर्षों में बीजेपी ने रोक दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता उन परियोजनाओं को फिर से शुरू करना होगा।