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Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट को एक हफ्ते में क्यों दो बार अपने फैसले का मतलब स्पष्ट करना पड़ा?

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड मामले की सुनवाई के दौरान 18 मार्च को यह पाया कि एसबीआई ने बॉन्ड के अल्फान्यूमेरिक नंबर और सीरियल नंबर की जानकारी नहीं दी है। इस पर उसने एसबीआई से पूछा कि उसने ये नंबर क्यों नहीं दिए हैं। इस पर एसबीआई के वकील ने कहा कि बैंक को यह पता नहीं था कि उसे बॉन्ड के अल्फान्यूमेरिक नंबर और सीरियल नंबर की भी जानकारी दी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 18, 2024 पर 6:50 PM
Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट को एक हफ्ते में क्यों दो बार अपने फैसले का मतलब स्पष्ट करना पड़ा?
भविष्य में किसी तरह के विवाद से बचने के लिए एसबीआई चेयरमैन को 21 मार्च तक शाम 5 बजे तक एक हलफनामा पेश करना होगा जिसमें यह बताया जाएगा कि उसके पास जो भी जानकारियां थी, उसने सौंप दी है और अब उसके पास कोई जानकारी नहीं बची है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पांच जजों की बेंच ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के चेयरमैन को 18 मार्च को एक आदेश दिया। इसमें उन्हें एक शपथपत्र देना होगा, जिसमें यह बताना होगा कि बैंक ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स से जुड़ी सभी जानकारियां चुनाव आयोग (ECI) को सौंप दिया है। एक हफ्ते के अंदर यह सुप्रीम कोर्ट का इलेक्टोरल बॉन्ड्स मामले में दूसरा आदेश है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड्स मामले में अपने आदेश का सही मतलब नहीं समझने के लिए दूसरी बार एसबीआई चेयरमैन को फटकार लगाई है। मनीकंट्रोल आपको इस मामले में कोर्ट के निर्देश का मतलब और उन स्थितियों के बारे में बता रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट को एक हफ्ते में दो बार एसबीआई चेयरमैन को हलफनामा देने का आदेश देना पड़ा।

11 मार्च को क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल फरवरी में इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम को असंवैधानिक ठहराया था। उसने कहा था कि राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे की जानकारी उजागर नहीं करना नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने SBI को इलेक्टोरल बॉन्ड्स से जुड़ी सभी जानकारियां 6 मार्च तक चुनाव आयोग को सौंपने को कहा था। चुनाव आयोग को इन जानकारियों को 13 मार्च तक सार्वजनिक करने को कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, "एसबीआई को राजनीतिक दलों की तरफ भुनाए गए हर बॉन्ड की जानकारी देनी होगी। इसमें बॉन्ड भुनाने की तारीख और बॉन्ड की वैल्यू भी शामिल होगी।" लेकिन, एसबीआई ने 4 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में एक अप्लिकेशन दिया, जिसमें इलेक्टोरल बॉन्ड्स से जुड़ी जानकारियां देने के लिए 30 जून तक का समय देने की गुजारिश की गई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई पर नाराजगी जताई। उसका कहना था कि एसबीआई ने यह याचिका क्यों दाखिल की जब मामले की सुनवाई के लिए पहले से 11 मार्च की तारीख तय थी।

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