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ड्राइवर को 53,000 रुपये महीना देने पर बोले अंकुर वारिकू, बताया इसे ‘बेहतरीन निवेश’ क्यों मानते हैं

13 साल तक किसी परिवार के साथ काम करते-करते रिश्ता सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहता। अंकुर वारिकू ने अपने ड्राइवर दयानंद की कहानी साझा की, जो 15 हजार रुपये की शुरुआती सैलरी से अब 53,350 रुपये महीना कमा रहे हैं। उनकी जिम्मेदारियां और परिवार का भरोसा बढ़ा, लेकिन पोस्ट पर एक नई बहस भी छिड़ गई

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Oct 04, 2026 पर 4:04 PM
ड्राइवर को 53,000 रुपये महीना देने पर बोले अंकुर वारिकू, बताया इसे ‘बेहतरीन निवेश’ क्यों मानते हैं
वारिकू ने बताया कि समय के साथ दयानंद का काम सिर्फ गाड़ी चलाने तक नहीं रहा।

नौकरी की शुरुआत अक्सर सैलरी से होती है, लेकिन कई बार सालों के साथ रिश्ता सिर्फ काम और पैसे तक सीमित नहीं रहता। लेखक और उद्यमी अंकुर वारिकू ने अपने परिवार के ड्राइवर दयानंद की कहानी शेयर करते हुए कुछ ऐसा ही अनुभव बताया। दयानंद पिछले 13 साल से उनके परिवार के साथ हैं और इस दौरान उनकी भूमिका एक ड्राइवर से बढ़कर भरोसेमंद साथी जैसी हो गई।

13 साल पहले 15 हजार थी सैलरी

वारिकू के मुताबिक, दयानंद ने करीब 13 साल पहले उनके परिवार के साथ 15,000 रुपये महीने की सैलरी पर काम शुरू किया था। आज उन्हें 53,350 रुपये प्रति माह मिलते हैं। इसके अलावा उनके परिवार को हेल्थ इंश्योरेंस, दिवाली पर एक महीने की अतिरिक्त सैलरी और एक स्कूटी जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

ड्राइवर से बढ़कर परिवार का भरोसेमंद सदस्य

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