नौकरी की शुरुआत अक्सर सैलरी से होती है, लेकिन कई बार सालों के साथ रिश्ता सिर्फ काम और पैसे तक सीमित नहीं रहता। लेखक और उद्यमी अंकुर वारिकू ने अपने परिवार के ड्राइवर दयानंद की कहानी शेयर करते हुए कुछ ऐसा ही अनुभव बताया। दयानंद पिछले 13 साल से उनके परिवार के साथ हैं और इस दौरान उनकी भूमिका एक ड्राइवर से बढ़कर भरोसेमंद साथी जैसी हो गई।
