हिमाचल प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस के 6 बागी विधायक, स्पीकर के अयोग्य ठहराने के फैसले को दी चुनौती

कांग्रेस के 6 बागी विधायकों ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बागी विधायकों ने कहा कि स्पीकर का आदेश 'अवैध और असंवैधानिक' है। इन सभी 6 विधायकों को हाल के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ करने के बाद अयोग्य ठहराया गया था

अपडेटेड Mar 05, 2024 पर 4:38 PM
बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है

कांग्रेस के 6 बागी विधायकों ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बागी विधायकों ने कहा कि स्पीकर का आदेश 'अवैध और असंवैधानिक' है। इन सभी 6 विधायकों को हाल के राज्यसभा चुनावों में बीजेपी के पक्ष में ‘क्रॉस वोटिंग’ करने के बाद अयोग्य ठहराया गया था। राज्यसभा चुनाव में BJP के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले कांग्रेस के ये बागी विधायक बाद में कांग्रेस पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए बजट पर मतदान के दौरान सदन से अनुपस्थित रहे थे। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने इस आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की थी। अयोग्य ठहराए गए विधायकों में राजिंदर राणा, सुधीर शर्मा, इंदर दत्त लखनपाल, देविंदर कुमार भुट्टू, रवि ठाकुर और चैतन्य शर्मा शामिल हैं।

अब इन पूर्व विधायकों ने हिमालच के विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के 29 फरवरी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्हें अयोग्य घोषित किये जाने के बाद में विधायकों की मौजूदा संख्या 68 से घटकर 62 रह गई है, जबकि कांग्रेस विधायकों की संख्या 40 से घटकर 34 हो गई। पिछले हफ्ते, इन 6 बागी विधायकों ने अपनी अयोग्यता को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था।

इस मामले की शुरुआत फरवरी के अंत में हुई, जब हिमाचल प्रदेश में एक राज्यसभा सीट के लिए मतदान हुआ। इस मतदान में कांग्रेस के 6 विधायकों ने बगावत करते हुए बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग किया, जिससे कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को हार का सामना करना पड़ा।


विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इन बागी विधायकों को बाद में अयोग्य घोषित कर दिया। इन विधायकों को अयोग्य इस आधार पर ठहराया गया कि इन्होंने बजट सत्र के दौरान लागू पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए विधानसभा में बजट पर मतदान से परहेज किया था।

इसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बजट पारित कराने में कामयाब रही। पठानिया ने 15 बीजेपी विधायकों को बजट पर मतदान के दौरान सदन से निलंबिक कर दिया था, जिसके बाद वित्त विधेयक ध्वनि मत से पारित हो गया।

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