Lok Sabha Elections 2024: 'कांच की नगरी' या 'सुहाग नगरी' के नाम से पहचाने जाने वाला फिरोजाबाद (Firozabad), किसी जमाने में राजा-महाराजाओं के दरबारों को सजाने के लिए झाड़-फानूस बनाने के लिए मशहूर था। आज यह कलाइयों को सजाने वाली चूड़ियों का गढ़ कहलाता है। लेकिन साथ ही यह उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में एक महत्वपूर्ण सीट के तौर पर भी जाना जाता है। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान फिरोजाबाद सीट से BJP (Bhartiya Janata Party) के डॉ. चंद्र सेन जादोंन जीते थे। उन्हें 495819 वोट मिले थे।
उनकी कड़ी टक्कर समाजवादी पार्टी (SP) के अक्षय यादव से थी, जो कि मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रामगोपाल यादव के बेटे हैं। डॉ. चंद्र सेन जादोंन से पहले अक्षय यादव ही फिरोजाबाद से सांसद थे। 2019 के चुनावों में अक्षय को 467038 वोट मिले थे। उनके चाचा और PSP (लोहिया) के शिवपाल सिंह यादव को 91869 वोटों से संतोष करना पड़ा था।
फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर तीसरे चरण के तहत 7 मई 2024 को वोट पड़ेंगे। इसे समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है।
इस बार किसके बीच है टक्कर
लोकसभा चुनाव 2024 में यह सीट किसके कब्जे में जाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिरोजाबाद लोकसभा सीट के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से SP के अक्षय यादव को एक बार फिर कैंडिडेट बनाया गया है। इस सीट से अक्षय को तीसरी बार प्रत्याशी घोषित किया गया है। बदलाव यह है कि इस बार के चुनावों में उन्हें चाचा शिवपाल यादव का भी साथ मिलेगा, जिन्होंने 2019 में पार्टी से अलग होकर चुनाव लड़ा था।
2019 में सपा और बसपा के बीच चुनावी तालमेल था। ऐसे में इस सीट के लिए अक्षय यादव साझे उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। लेकिन चाचा शिवपाल यादव ने अपनी मूल पार्टी से अलग होकर नई पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) से चुनाव लड़ा। शिवपाल को जिले के कई कद्दावर नेताओं का साथ मिला। चाचा-भतीजे की जंग में सपा के वोट कट गए और हार का मुंह देखना पड़ा। हालांकि इस बार एक चुनौती यह है कि सपा के कुनबे में शामिल कई कद्दावर अलग राहें पकड़ चुके हैं। पार्टी कई पुराने बिछड़े लोगों को शामिल करने की जद्दोजहद कर रही है।
अन्य पार्टियों की बात करें तो BJP ने क्षत्रिय प्रत्याशी ठाकुर विश्वदीप सिंह को टिकट दिया है। 2014 का लोकसभा चुनाव विश्वदीप सिंह ने BSP के टिकट पर लड़ा था। वह 1,18,909 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2014 के चुनाव के बाद वह BJP के साथ जुड़ गए। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने इस बार सतेंद्र जैन सौली को मैदान में उतारा है। सौली अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ रहे हैं। फिरोजाबाद सीट पर जैन समाज सहित सभी वैश्य वर्गों के वोटरों की संख्या 2.5 लाख से ज्यादा है। ऐसे में मायावती की BSP ने इस बार जैन प्रत्याशी पर दांव लगाया है।
शुरुआत में फिरोजाबाद सीट कभी किसी एक पार्टी के हक में नहीं रही। इस सीट पर जनता का मिजाज बदलता रहा। फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर 1957 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। 1967 में सोशलिस्ट पार्टी ने यहां से चुनाव जीता और 1971 में कांग्रेस ने यहां पर जीत हासिल की। 1991 के बाद इस सीट पर लगातार तीन बार बीजेपी का उम्मीदवार जीता, और वह थे प्रभु दयाल कठेरिया। फिर 1999 और 2004 में सपा के रामजी लाल सुमन ने बड़ी जीत हासिल की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 2009 में फिरोजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीते भी थे। लेकिन उन्होंने चुनाव के बाद इस सीट को छोड़कर कन्नौज सीट को थामे रहना पसंद किया और उपचुनाव में फिरोजाबाद सीट से डिंपल यादव उम्मीदवार बनीं। लेकिन दोबारा चुनाव में डिंपल यादव को हराकर कांग्रेस की ओर से राजबब्बर ने चुनाव जीता। 2014 में फिरोजाबाद संसदीय सीट अक्षय यादव के हाथ में गई और साल 2019 में फिरोजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर वर्तमान में बीजेपी के चंद्र सेन जादोंन 17वीं लोकसभा के सदस्य हैं।
क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधानसभा सीट
2011 की जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार, फिरोजाबाद क्षेत्र में 15 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम जनसंख्या है। 2019 में वोटरों की संख्या 10,75,866 थी। इनमें से पुरुष मतदाता की संख्या 5,92,593 और महिला मतदाता 4,79,885 की संख्या थी। 2019 में कुल मतदान प्रतिशत 60.09% रहा था। फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं- इनमें टूंडला, जसराना, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद और सिरसागंज।