Lok Sabha Elections 2024: देश के सभी राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से कभी भी तारीखों का ऐलान हो सकता है। इस बीच अगर अरुणाचल प्रदेश की बात करें तो यहां लोकसभा की दो सीटें हैं। एक अरुणाचल पूर्व और दूसरी अरुणाचल पश्चिम की सीट है। बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए अरुणाचल प्रदेश की दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों के ऐलान कर दिए हैं। इस बार भी बीजेपी ने मौजूदा सांसद किरेन रिजिजू और तापिर गाओ पर फिर से भरोसा जताया है।
साल 2019 में यहां पहले चरण में 11 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। पिछली बार भी बीजेपी ने यहां से किरण रिजिजू पर दांव लगाया था। उन्होंने 1,74,843 मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। इस बार भी बीजेपी ने अपने पुराने प्रत्याशियों को ही मैदान में उतारा है।
अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक समीकरण
उत्तर-पूर्व भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य में प्रमुख राजनीतिक खिलाड़ी भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड) और पीपुल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल हैं। अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू हैं, जो कि भारतीय जनता पार्टी से हैं। राज्य में बीजेपी की सरकार है। राज्य में कांग्रेस और अन्य पार्टियों में काफी उथल-पुथल मची हुई है। हाल ही में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और NPP के 4 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं। राज्य में विधानसभा की 60 सीटें हैं। इसमें अब भाजपा के पास 53 विधायक हो गए हैं। वहीं कुछ निर्दलीय विधायकों ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी अपने कुनबे के विस्तार में जुटी हुई है।
लोकसभा चुनाव साल 2019 के नतीजे
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व सीट से कांग्रेस पार्टी के निनोंग झरिंग जीते थे। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अरुणाचल पश्चिम से केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने जीत हासिल की थी। रिजिजू को 2,25,796 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार नबम तुकी को महज 50,953 वोट ही मिले थे। वहीं अरुणाचल पूर्वी सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार तापिर गाओ ने 69,948 वोटों के अंतर के साथ मुकाबला जीता था। यहां पर तापिर गाओ ने कांग्रेस कैंडिडेट लोवांगचा वांगलात को शिकस्त दी थी। तापिर गाओ को 1,53,883 वोट मिले जबकि लोवांगचा वांगलात को 83,935 मत मिल पाए। फिलहाल अभी यहां कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस से टिकट मिलने के बाद यहां का चुनाव रोमांचक हो सकता है।
अरुणाचल प्रदेश कभी असम का हिस्सा रहा है। ब्रिटिश शासकों ने 1838 में इसे अपने राज्य में शामिल किया। स्वतंत्रा के बाद और 1962 से पहले अरुणाचल प्रदेश नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर (नेफा) के नाम से जाना जाता था। 1972 में इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया। इसके बाद 20 फरवरी 1987 को अरुणाचल प्रदेश को भारत के 24वें राज्य के रूप में पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। अरुणाचल प्रदेश को भारत में सूर्य के उगने का प्रदेश कहा जाता है।