Bihar Lok Sabha Elections 2024: बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 में सीट शेयरिंग को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) खेमे में उठापटक की स्थिति बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 195 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है लेकिन बिहार में सहयोगी दलों की सीटों की मांग से पार्टी हाई कमान की परेशानी बढ़ दी है। NDA ही नहीं बल्कि I.N.D.I.A. गठबंधन में भी सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसा हुआ है। ऐसे में I.N.D.I.A. गठबंधन ने राजनीतिक शतरंज की बिसात पर एक चाल चली है।
सूत्रों के मुताबिक, I.N.D.I.A. गठबंधन ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को राज्य में 8 और उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों की पेशकश की है। यह ऑफर पासवान के लिए आकर्षक साबित हो सकता है, जिन्हें कथित तौर पर NDA द्वारा बिहार में केवल 6 लोकसभा क्षेत्रों की पेशकश की जा रही है। फिलहाल इस ऑफर पर LJP की तरफ से कुछ भी बयान नहीं दिया गया है लेकिन पार्टी के अंदर इसे लेकर मंथन जारी है।
I.N.D.I.A. गठबंधन की पेशकश में वे सभी 6 सीटें शामिल हैं जिन पर अविभाजित लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने 2019 में चुनाव लड़ा था। बिहार में दो और उत्तर प्रदेश में दो अतिरिक्त निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में एक डील शामिल है। पार्टी प्रमुख और अनुभवी नेता राम विलास पासवान की मृत्यु के एक साल बाद उनके भाई पशुपति पारस द्वारा तख्तापलट के बाद 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी विभाजित हो गई थी।
हाजीपुर सीट को लेकर है घमासान
चिराग पासवान हाजीपुर सीट से भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। वहीं उनके चाचा पशुपति पारस किसी भी हालत में हाजीपुर सीट छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि LJP का असली उत्तराधिकारी चिराग पासवान हो सकते हैं लेकिन राजनीतिक उत्तराधिकारी मैं ही हूं। पशुपति पारस, राम विलास पासवान के भाई हैं, जबकि चिराग पासवान उनके बेटे हैं।
नीतीश कुमार के साथ मतभेदों के कारण 2020 में NDA छोड़ने के बाद चिराग पासवान पिछले साल गठबंधन में फिर से शामिल हो गए थे। इस साल की शुरुआत में जेडीयू प्रमुख के एनडीए में लौटने के बाद से कथित तौर पर चिराग नाराज चल रहे हैं। उन्होंने हाल ही में तेजस्वी यादव से मुलाकात भी की थी।
BJP और JDU ने 2019 में बिहार में 17-17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। जबकि शेष 6 सीटों पर एलजेपी ने चुनाव लड़ा था। बीजेपी और एलजेपी ने उन सभी सीटों पर जीत हासिल की थी जिन पर उन्होंने चुनाव लड़ा था और जेडीयू केवल किशनगंज में पिछड़ गई थी, जो वह कांग्रेस से हार गई थी। एनडीए में बड़े साझेदार कथित तौर पर उसी व्यवस्था को दोहराने के इच्छुक हैं। बिहार अपनी 40 सीटों के साथ लोकसभा में चौथे सबसे अधिक संख्या में सांसद भेजता है। विपक्षी गठबंधन 39-1 की हार के बाद एनडीए के रथ को रोकने की अपनी संभावनाओं की कल्पना कर रहा है।