Loksabha Election 2024: PM मोदी से ओवैसी तक, ये 10 बड़े चेहरे तय करेंगे इस लोकसभा चुनाव की दशा और दिशा
Loksabha Election 2024: इन प्रमुख नेताओं और रणनीतिकारों पर इस बार सबका ध्यान केंद्रित रहने वाला है। इस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से लेकर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी उन 10 प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में शामिल हैं, जो किसी न किसी स्तर पर चुनावी विमर्श तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी
MoneyControl News
अपडेटेड Apr 16, 2024 पर 2:07 PM
Loksabha Election 2024: PM मोदी से ओवैसी तक, ये 10 बड़े चेहरे तय करेंगे इस बार लोकसभा चुनाव की दशा और दिशा
Loksabha Election 2024: देश में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) का बिगुल बजने के साथ ही चुनाव मैदान में जहां कई ऐसे प्रखर वक्ता दिखेंगे, जो वाक् कौशल से सबका ध्यान खीचेंगे, तो कई ऐसे चेहरे भी हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर रणनीति तैयार कर पार्टी की जीत का खाका तैयार करने में जुटे हैं। इन प्रमुख नेताओं और रणनीतिकारों पर इस बार सबका ध्यान केंद्रित रहने वाला है। इस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से लेकर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी उन 10 प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में शामिल हैं, जो किसी न किसी स्तर पर चुनावी विमर्श तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
नरेंद्र मोदी:
लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए प्रयासरत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) न केवल भारत पर अपने चुनावी प्रभुत्व की मुहर लगाना चाहते हैं, बल्कि पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए लगातार एक और जीत के साथ इतिहास रचने की कोशिश में हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ‘मोदी की गारंटी’ और ‘विकसित भारत’ के ईद-गिर्द चुनावी विमर्श को खड़ा करने की कोशिश में लगे हैं। 73 साल के मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के आत्मविश्वास के साथ चुनाव में उतर रहे हैं और उन्होंने अपने अगले कार्यकाल के लिए खाका पर काम भी शुरू कर दिया है।
PM मोदी खुद भी ये कह चुके हैं, उन्होंने अभी से ही अपनी अगली सरकार के अगले 100 दिनों कामों का एजेंडा भी तय कर लिया है और अपने सांसदों से भी इसके लिए तैयार रहने को कहा है।
अमित शाह:
केंद्रीय मंत्रिमंडल में अघोषित 'नंबर 2' और बीजेपी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले अमित शाह (Amit Shah) एक बार फिर अपनी पार्टी की रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। चाहे अनुच्छेद 370 को निरस्त करना हो या संशोधित नागरिकता कानून (CAA), उन्होंने गृह मंत्री के रूप में कई मुश्किल परिस्थितियों में सरकार को संभाला है। 59 साल के शाह एक बार फिर चुनावी युद्ध के मैदान में अपने सैनिकों का नेतृत्व करते हुए एक सेनापति के अवतार में नजर आएंगे।
राहुल गांधी:
कांग्रेस अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को पार्टी के लिए ‘वैचारिक धुरी’ कहती है। कन्याकुमारी से कश्मीर तक की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने उनकी छवि में बदलाव किया, लेकिन राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार ने इस पर सवालिया निशान लगा दिया है कि उनकी यात्रा कितनी असरदार थी।
अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के साथ, 53 साल के गांधी फिर से लोगों के लिए ‘न्याय’ सुनिश्चित करने के मकसग से जनता के बीच हैं। यह लोगों को पसंद आएगा या नहीं, ये तो सिर्फ समय ही बताएगा।
मल्लिकार्जुन खड़गे:
कांग्रेस के कार्यकर्ता से शुरुआत कर अध्यक्ष पद तक पहुंचे मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) सक्रिय राजनीति में पांच दशक का अनुभव रखते हैं। उन्होंने अक्टूबर, 2022 में पार्टी की कमान संभाली। 81 साल के खड़गे को अब कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए अपनी सबसे कड़ी परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
ममता बनर्जी:
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। लेकिन इससे पहले विपक्षी गठबंधन 'I.N.D.I.A.' के साथ प्रदेश में उनकी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर ऊहापोह की स्थित लंबे समय तक बनी रही।
69 साल बनर्जी पश्चिम बंगाल में बीजेपी को कड़ी टक्कर देती हैं और भारतीय जनता पार्टी के साथ द्वंद्व में उलझी हुई हैं। BJP ने संदेशखालि के मामले को लेकर उन पर हमले तेज कर दिए हैं।
जब विपक्षी दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन की बात आती है, तो ममता बनर्जी का मंत्र ‘एकला चलो’ का होता है, लेकिन वो BJP के विरोध में वैचारिक मुद्दे पर दृढ़ दिखती हैं।
नीतीश कुमार:
बिहार की सत्ता में बने रहने और आसानी से राजनीतिक गठबंधन बदलने के अपने कौशल के लिए जाने जाने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर पाला बदला है।
73 साल के नेता का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में जाना, ‘I.N.D.I.A.’ गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। उनके BJP के साथ हाथ मिलाने से बिहार में नाटकीय रूप से स्थिति बदल गई है। अब लोगों को उनके इस नए 'पाला बदलने' पर निर्णय देना है।
शरद पवार:
शरद पवार (Sharad Pawar) भारतीय राजनीति के दिग्गजों में शुमार किए जाते हैं। अपने ही भतीजे अजित पवार से परेशान और धोखा खाने वाले 83 साल के मराठा नेता शायद अपने करियर के आखिरी पड़ाव में सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहे हैं।
कभी हार न मानने वाले रवैये के लिए पहचाने जाने वाले पवार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए मुश्किल साबित हो सकते हैं। उनकी पहल पर ही महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) अस्तित्व में आया था।
एम के स्टालिन:
DMK सुप्रीमो ने तमिलनाडु में अपना प्रभुत्व स्थापित किया है और दक्षिणी राज्य में BJP के खिलाफ विपक्ष की बड़ी ताकत हैं। एमके स्टालिन (MK Stalin) से तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन को महत्वपूर्ण चुनावी बढ़त दिलाने की उम्मीद है।
71 साल के स्टालिन गांधी परिवार के कट्टर समर्थक हैं, लेकिन उनकी पार्टी के नेताओं की ‘सनातन धर्म’ पर विवादित बयानबाजी ने कई मौकों पर ‘I.N.D.I.A.’ गठबंधन को बैकफुट पर ला दिया और उत्तर में उन्हें नुकसान हो सकता है।
तेजस्वी यादव:
RJD नेता फिर से बिहार में विपक्ष में हैं, लेकिन ‘I.N.D.I.A.’ गठबंधन में उनका कद बढ़ गया है। 34 साल के तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने बिहार में विपक्षी खेमे का उत्साहपूर्वक नेतृत्व किया है और कई लोग उन्हें बिहार में उनके पिता लालू प्रसाद की विरासत के सक्षम उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं। वह NDA के गणित को बिगाड़ पाएंगे या नहीं, इसका इम्तिहान लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections 2024) में होगा।
असदुद्दीन औवेसी:
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख ने अक्सर विधानसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन के लिए ‘खेल बिगाड़ने’ की भूमिका निभाई है और कुछ नेताओं ने उन्हें बीजेपी की ‘बी-टीम’ करार दिया है।
54 साल के असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) तेलंगाना के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पार्टी के बढ़ने और चुनाव लड़ने के अधिकार को लेकर दृढ़ रहे हैं। क्या वह विपक्षी दलों या BJP का गणित बिगाड़ देंगे, यह देखना भी दिलचस्प रहेगा।