Maharashtra Loksabha Election: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शरद पवार (Sharad Pawar) की अगुवाई वाले गुट को ‘तुरही बजाता व्यक्ति’ चुनाव निशान मिलने के बीच इस पारंपरिक वाद्ययंत्र को बजान वालों को इस साल उनका धंधा चौपट होने की आशंका सता रही है, क्योंकि आम चुनाव और शादी का सीजन एक समय पर पड़ रहा है। उन्हें आशंका है कि आदर्श आचार संहिता लग चुकी है, ऐसे में इस साल उन्हें शायद शादियों और दूसरे कार्यक्रमों में ‘तुरही’ बजाने का काम नहीं मिलेगा।
तुरही दिखने में अंग्रेजी के ‘C’ अक्षर से मिलती-जुलती है और इसे किसी का स्वागत करने के लिए बजाया जाता है। पहले, इसे राजाओं के आगमन पर बजाया जाता था।
यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में तुरही बजाने वाले वादक मुहैया कराने के पेशे में लगे जयसिंह होलिये ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा कि यह पारंपरिक वाद्ययंत्र है और इसे शादी और दूसरे कई समारोह में बजाया जाता है।
तुरही बजाने वालों को चिंता क्यों?
उन्होंने कहा, "लेकिन इस साल, लोकसभा चुनाव और शादी का सीजन एक समय पर है। ऐसे में हमें डर है कि इस साल हमारा धंधा चौपट न हो जाए।"
शहर में रहने वाले तुरही वादक बाबूराव गुराव ने कहा, "राजनीतिक दलों के पास हमारे रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल आने वाली चीजें या एक जैसे चुनाव चिन्ह के रूप में हैं। हम इनसे बच नहीं सकते, लेकिन हम इस बात को लेकर पक्के नहीं है कि एक प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़ाव होने के कारण शादियों और दूसरे पारिवारिक कार्यक्रमों में तुरही को कहां बजाया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "राजनीतिक कार्यक्रमों में हमारा धंधा छूट सकता है। आम तौर पर तुरही वादकों को सभी राजनीतिक दल चुनाव रैलियों में बुलाते हैं। लेकिन, चूंकि हमारा वाद्ययंत्र अब एक राजनीतिक दल का निशान बन गया है, ऐसे में हमें डर है कि शायद राजनीतिक दलों से ऑर्डर नहीं मिले। चूंकि आदर्श आचार संहिता प्रभाव में है, ऐसे में लोग हमें सांस्कृतिक या पारिवारिक कार्यक्रमों में भी नहीं बुलाने पर विचार कर सकते हैं।"