North East Lok Sabha Elections 2024: भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने आगामी लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। मतदान 19 अप्रैल से शुरू होकर 1 जून को समाप्त होगा। जबकि वोटों की गिनती पूरे देश में 4 जून को होगी। 7 चरणों में कुल 543 निर्वाचन क्षेत्र शामिल होंगे। हम आपकों नॉर्थ ईस्ट यानी पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के बारे में जानकारी दे रहे हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में बीजेपी गठबंधन अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश में लगा हुआ है। जबकि कांग्रेस के लिए सियासी जमीन सिकुड़ती जा रही है। बीजेपी के लिए सियासी तौर ये राज्य 2024 के लिए टानिक से कम नहीं है।
पूर्वोत्तर में कितने सीट हैं?
पूर्वोत्तर भारत में ऐसे कई राज्य हैं जिनके खाते में केवल एक या दो लोकसभा सीटें हैं, जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम जैसे प्रदेश शामिल हैं। पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में कुल 25 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें असम में सबसे ज्यादा 14 सीट हैं। वहीं, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर तथा त्रिपुरा में दो-दो सीटें हैं, जबकि मिजोरम, नागालैंड तथा सिक्किम में एक-एक सीट है।
क्षेत्रीय दलों का इस क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से वर्चस्व रहा है। राष्ट्रीय दलों को अपनी स्थिति स्थापित करने में कठिनाई हो रही है। बहरहाल, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) आगामी आम चुनावों में जीत के लिए एक गंभीर दावेदार बन गई है। यह क्षेत्र अब एक संभावित स्विंग स्टेट है, जो राष्ट्रीय और राष्ट्रीय दोनों तरह से अंतिम परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
क्षेत्रीय दल इन इलाकों में नियंत्रण के लिए लड़ते हैं। भगवा पार्टी एक बार फिर उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में NDA के लिए नेतृत्व करेगी। लेकिन, उन्हें एक बार फिर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों दोनों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिनका इन क्षेत्रों में सत्तारूढ़ सरकार की तुलना में थोड़ा बेहतर इतिहास है।
पूर्वोत्तर राज्यों में कब होंगे लोकसभा चुनाव 2024?
- मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने घोषणा की है कि मणिपुर में लोकसभा चुनाव 2 चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल और दूसरे चरण की वोटिंग 26 अप्रैल को होगी।
- चुनाव आयोग के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम नागालैंड और मेघालय में 19 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा।
- त्रिपुरा में 19 और 26 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।
- इन क्षेत्रों का नेतृत्व आमतौर पर क्षेत्रीय दलों द्वारा किया जाता था, लेकिन 2014 और 2019 के आम चुनावों के बाद बीजेपी ने धीरे-धीरे इन क्षेत्रों में अपने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं।
2019 में किसे कितनी सीटें मिली थीं?
2019 के आम चुनाव में अरुणाचल प्रदेश की दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा जमाया था। अरुणाचल प्रदेश पश्चिम सीट पर जीतने वाले किरेन रिजिजू केंद्र की मोदी सरकार में बड़े मंत्री हैं। वहीं, मणिपुर की बात करें तो वहां की भीतरी मणिपुर सीट पर भगवा पार्टी ने कब्जा किया था। जबकि बाहरी सीट पर NPF को जीत मिली थी। मणिपुर से आने वाले आर रंजन सिंह को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया है।
इसके अलावा मेघालय की शिलांग सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी ने बाजी मारी थी। जबकि तरा सीट पर NPP ने जीत हासिल की थी। त्रिपुरा की दोनों ही सीटों पर BJP ने जीत का परचम लहराया था। प्रतिमा भौमिक अभी मोदी सरकार में मंत्री हैं। मिजोरम की एक सीट पर MNF की जीत हुई थी। जबकि नागालैंड की एक सीट पर NDPP ने जीत हासिल की थी। सिक्किम की एक सीट पर SKM को जीत मिली थी। इस बार भी पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी अन्य पार्टियों से काफी मजबूत दिख रही है। केंद्र में 10 साल से सत्तारुढ़ पार्टी के एजेंडे में पूर्वोत्तर काफी महत्व रखता है। कई केंद्रीय मंत्री लगातार पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा करते रहते हैं।