UP Upchunav 2024: 'बटेंगे तो कटेंगे' Vs 'जुड़ेंगे तो जीतेंगे': यूपी उपचुनाव में नारों पर सियासी खींचतान
UP By-Election 2024: यूपी उपचुनाव में 'बटेंगे तो कटेंगे', 'जुड़ेंगे तो जीतेंगे', 'ना कोई बंटेगा ना कोई कटेगा' और 'मठाधीश बांटेंगे और काटेंगे... PDA जोड़ेगी और जीतेगी," जैसे राजनीतिक नारे ध्रुवीकरण की कोशिश और जाति के मुद्दे पर प्रतिक्रिया स्वरूप उभरे हैं
UP bypolls: यूपी की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा और मतगणना 23 नवंबर को होगी
UP By-Election 2024: राजनीतिक रूप से संवेदनशील उत्तर प्रदेश में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले विभाजनकारी नारों को लेकर सियासी खींचतान अपने चरम पर है। 'बटेंगे तो कटेंगे', 'जुड़ेंगे तो जीतेंगे', 'ना कोई बंटेगा ना कोई कटेगा' और 'मठाधीश बांटेंगे और काटेंगे... पीडीए जोड़ेगी और जीतेगी," जैसे राजनीतिक नारे ध्रुवीकरण की कोशिश और जाति के मुद्दे पर प्रतिक्रिया स्वरूप उभरे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच इस संबंध में लगातार नारेबाजी हो रही है।
उत्तर प्रदेश में जिन 9 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होना है, उनमें कटेहरी (अंबेडकरनगर), करहल (मैनपुरी), मीरापुर (मुजफ्फरनगर), गाजियाबाद, मझवां (मिर्जापुर), सीसामऊ (कानपुर), खैर (अलीगढ़), फूलपुर (प्रयागराज) और कुंदरकी (मुरादाबाद) शामिल हैं। मतगणना 23 नवंबर को महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के साथ होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जातिगत मतभेदों से परे हिंदुओं को एकजुट करने के लिए "बटेंगे तो काटेंगे" का नारा दिया है। विरोधियों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर चुनावी लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है।
केशव प्रसाद मौर्य का सपा पर हमला
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नारे की आलोचना करते हुए इसे "इतिहास का सबसे खराब नारा" करार दिया। पूर्व सीएम ने बीजेपी पर सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालने वाला विभाजनकारी संदेश फैलाने का आरोप लगाया। हालांकि, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जवाबी हमला करते हुए आरोप लगाया कि सपा वोटों के लिए "जिहादियों" की चापलूसी करती है। हाल ही में एक पोस्ट में मौर्य ने दावा किया कि सपा का एजेंडा मुसलमानों को खुश करना और राजनीतिक लाभ के लिए "जिहादियों का समर्थन" करना है।
अखिलेश का पलटवार
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने 'बंटेंगे तो कटेंगे' नारे को लेकर परोक्ष रूप से BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि नकारात्मक नारा उनकी निराशा और नाकामी का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि "देश के इतिहास में यह नारा निकृष्टतम-नारे'के रूप में दर्ज होगा और उनके राजनीतिक पतन के अंतिम अध्याय के रूप में आखिरी शाब्दिक कील-सा साबित होगा।"
सपा प्रमुख ने किसी का नाम लिए बगैर X पर एक पोस्ट में कहा, "उनका नकारात्मक-नारा उनकी निराशा-नाकामी का प्रतीक है। इस नारे ने साबित कर दिया है कि उनके जो गिनती के 10 प्रतिशत मतदाता बचे हैं अब वे भी खिसकने के कगार पर हैं, इसीलिए ये उनको डराकर एक करने की कोशिश में जुटे हैं लेकिन ऐसा कुछ होने वाला नहीं।"
उन्होंने कहा, "नकारात्मक-नारे का असर भी होता है, दरअसल इस निराश-नारे के आने के बाद, उनके बचे-खुचे समर्थक ये सोचकर और भी निराश हैं कि जिन्हें हम ताकतवर समझ रहे थे, वो तो सत्ता में रहकर भी कमजोरी की ही बातें कर रहे हैं। जिस आदर्श राज्य की कल्पना हमारे देश में की जाती है, उसके आधार में अभय होता है। भय नहीं। ये सच है कि भयभीत ही भय बेचता है क्योंकि जिसके पास जो होगा, वो वही तो बेचेगा।"
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के इतिहास में यह नारा निकृष्टतम-नारे के रूप में दर्ज होगा और उनके (BJP) राजनीतिक पतन के अंतिम अध्याय के रूप में आखिरी शाब्दिक कील-सा साबित होगा।
सपा अध्यक्ष ने कहा, "देश और समाज के हित में उन्हें अपनी नकारात्मक नजर और नजरिये के साथ अपने सलाहकार भी बदल लेने चाहिए, ये उनके लिए भी हितकर साबित होगा। एक अच्छी सलाह ये है कि पालें तो अच्छे विचार पालें और आस्तीनों को खुला रखें, साथ ही बाँहों को भी, इसी में उनकी भलाई है।" अखिलेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में होने जा रहे उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच है।
मायावती की भी एंट्री
इस बढ़ती बयानबाजी के बीच, बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी अपना पक्ष रखा और सभी पक्षों से भड़काऊ भाषा के साथ सावधानी बरतने का आग्रह किया। विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी की अभियान रणनीति हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने के उद्देश्य से है। जबकि सपा बीजेपी की अपील का मुकाबला करने के लिए जाति और समुदाय के आधार पर अपने PDA गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हाल ही में, सपा कार्यालय के बाहर लगे एक नए पोस्टर ने बहस को फिर से हवा दे दी। इसमें लिखा था, "मठाधीश बांटेंगे और काटेंगे... पीडीए जोड़ेगी और जीतेगी।" यह विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ हाशिए पर पड़े समुदायों को एकजुट करने की सपा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस बीच, मायावती मतदाताओं को बीजेपी का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। अपनी पार्टी को SP-BJP के नारे के विकल्प के रूप में पेश कर रही हैं, जिसे वह अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला मानती हैं। "बटेंगे तो कटेंगे" का नारा उत्तर प्रदेश से आगे बढ़कर महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में भी गूंज रहा है। वहां बीजेपी हिंदू एकता को बढ़ावा देने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है।
"बटेंगे तो कटेंगे" का नारा पहली बार हरियाणा चुनावों के दौरान सामने आया था, जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने सामाजिक विभाजन को रोकने के लिए हिंदू एकता का आग्रह किया था। इसके जवाब जवाब में अखिलेश यादव ने जवाबी नारा "जुड़ेंगे तो जीतेंगे" दिया, जिसमें विभाजनकारी अपीलों पर सकारात्मक राजनीति पर जोर दिया गया। मायावती भी नारे की जंग में शामिल हो गईं, क्योंकि उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव के मैदान में बीएसपी के एंट्री ने बीजेपी और सपा दोनों को बेचैन कर दिया है। दोनों ही पार्टियां पोस्टर और नारों के माध्यम से जनता का ध्यान खींचने के लिए संघर्ष कर रही हैं।