Battle for Assam: असम की जोरहाट लोकसभा सीट पर क्यों है पैनी नजर? किन पार्टियों के बीच दिखेगी खींचतान

Battle for Assam: लोकसभा चुनाव के पहले चरण में असम में जोरहाट लोकसभा क्षेत्र का चुनाव सबसे ज्यादा उत्सुकता से देखे जाने वाले मुकाबलों में से एक साबित हो रहा है। फिलहाल ये सीट दूसरी बार सांसद बने तपन गोगोई के पास है। लेकिन अब कांग्रेस ने एक हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार और लोकसभा में अपने उपनेता गौरव गोगोई को यहां से मैदान में उतारा है। ये तीन बार के दिवंगत मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 2:20 PM
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भविष्यवाणी की थी कि भगवा पार्टी क्षेत्र में सहयोगियों के साथ कम से कम 22 सीटें जीतेगी। बता दें कि पूर्वोत्तर भारत में 25 लोकसभा सीटें हैं

Lok Sabha election 2024: भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) जमीनी रिपोर्टों और पूर्वोत्तर में राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर पूर्वोत्तर में भारी जनादेश हासिल करने की स्थिति में है। हालांकि कांग्रेस (Congress)के पक्ष में मजबूत अंडरकरेंट होने के बारे में कांग्रेस संचार प्रमुख जयराम रमेश (Congress communications chief Jairam Ramesh) ने टिप्पणी की है। उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारे में हलचल बढ़ा दी हैं। रमेश का दावा है कि उनका आकलन पूर्वोत्तर की उनकी हालिया यात्रा के दौरान क्षेत्र के लोगों के साथ व्यक्तिगत बातचीत पर आधारित है। दूसरी तरफ इस महीने की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam chief minister Himanta Biswa Sarma) ने भविष्यवाणी की थी कि भगवा पार्टी क्षेत्र में सहयोगियों के साथ कम से कम 22 सीटें जीतेगी। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में 25 लोकसभा सीटें हैं।

राज्य में एनडीए गठबंधन (NDA alliance) सभी 14 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। भाजपा ने 11 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। जबकि उसके सहयोगी असम गण परिषद (Asom Gana Parishad (AGP) दो सीटों पर और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (United Peoples' Party Liberal (UPPL) एक सीट पर चुनाव लड़ेगी।

क्यों जोरहाट लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र सबसे अधिक उत्सुकता से देखे जाने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है?


असम में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में जोरहाट लोकसभा क्षेत्र (Jorhat Lok Sabha constituency) का चुनाव सबसे ज्यादा उत्सुकता से देखे जाने वाले मुकाबलों में से एक साबित हो रहा है। यह सीट फिलहाल दूसरी बार सांसद बने तपन गोगोई (MP, Tapan Gogoi) के पास है।

चुनाव को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए एक वाकओवर माना जा रहा था। जब तक कि कांग्रेस ने एक हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार और लोकसभा में अपने उपनेता गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) को पेश नहीं किया। ये तीन बार के दिवंगत मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (late chief minister Tarun Gogoi) के बेटे भी हैं।

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मतदाताओं के मूड को समझते हुए, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी रैलियों की एक श्रृंखला को संबोधित करके अपनी उपस्थिति महसूस कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र ने समान रूप से मैदान में गौरव गोगोई के प्रवेश का स्वागत किया है। खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के साथ-साथ सात कैबिनेट मंत्री जोरहाट में डेरा डाले हुए हैं। ये भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

जोरहाट कांग्रेस का गढ़ था लेकिन 2014 के बाद से बीजेपी ने इस सीट पर दो बार जीत हासिल की। यह निर्वाचन क्षेत्र जो 10 विधानसभा सीटों को कवर करता है। यहां पर अहोम समुदाय (Ahom community) के लोगों की बड़ी संख्या है।

कांग्रेस के पक्ष में मजबूत अंडरकरंट?

जयराम रमेश ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस के पक्ष में समर्थन की प्रबल लहर है। लोगों के मन में डर है कि भाजपा यहां पर एकरूपता लागू कर देगी जिससे क्षेत्र की विविधता "नष्ट" हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में भाजपा की रणनीति अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय दलों का इस्तेमाल करने की रही है। लेकिन लोकसभा चुनाव में यह रणनीति काम नहीं आने वाली है।

लोकसभा चुनाव में मुद्दा हमारे संविधान में पूर्वोत्तर के लिए विशेष प्रावधानों का संरक्षण है। नागालैंड के लिए 371-ए, असम के लिए 371-बी, मणिपुर के लिए 371-सी, सिक्किम के लिए 371-एफ, मिजोरम के लिए 371-जी और अरुणाचल प्रदेश के लिए 371-एच का होना। ऐसा रमेश ने एआईसीसी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता में कहा। उन्होंने कहा कि ऐसी आशंका है कि जो सरकार धारा 370 को खत्म करने पर जोर दे सकती है। वह धारा 371 और इसके विशेष प्रावधानों को खत्म करने का भी सोच सकती है।

पिछले साल परिसीमन प्रक्रिया के बाद गौरव गोगोई ने अपना निर्वाचन क्षेत्र कलियाबोर (Kaliabor) से जोरहाट में शिफ्ट कर लिया है। परिसीमन के बाद, उनके लोकसभा क्षेत्र कलियाबोर का अस्तित्व समाप्त हो गया। निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद एक नया निर्वाचन क्षेत्र काजीरंगा (Kaziranga) बनाया गया।

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गौरव ने 2014 से लगातार दो बार कालियाबोर (पिछले साल परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर काजीरंगा हुआ) का प्रतिनिधित्व किया था। इस बार कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें जोरहाट के लिए हरी झंडी दे दी।

मौजूदा भाजपा सांसद तपन गोगोई ने 2019 में 82,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस विधायक सुशांत बोरगोहेन को हराया था।

चाय-जनजाति और अहोम समुदाय अहम कारक

प्रभावशाली ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (All Assam Students Union (AASU) के पूर्व महासचिव तपन और गौरव दोनों अहोम समुदाय से हैं। इस सीट पर कुल 17 लाख मतदाताओं में से लगभग 32% अहोम हैं। ये इसके परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण कारक साबित होंगे। जोरहाट जो भोगदोई नदी के दोनों किनारों पर मौजूद था, को अहोम राजवंश की अंतिम राजधानी कहा जाता था।

दूसरा समुदाय,जो नतीजे में भूमिका निभा सकता है, वह चाय-जनजाति समुदाय (tea-tribe community) है। यह समुदाय पहले कांग्रेस का प्रबल समर्थक था। लेकिन उनके समुदाय के लिए निर्देशित कल्याणकारी नीतियों के कारण वे भाजपा में शामिल हो गए।

 

 

 

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