क्रिप्टोकरेंसीज अभी तक सरकार की ओर से जारी करेंसी का विकल्प बनने में नाकाम रही हैं और न ही इन्हें बड़े स्तर पर मान्यता मिली है। हालांकि, करेंसी के साथ कुछ मुश्किलें भी हैं। सरकार की ओर से जारी करेंसी को ट्रांसफर करने, बैंक से विड्रा करने और कार्ड के जरिए इस्तेमाल करने पर चार्ज भी देने होते हैं।
बिटकॉइन ने क्रिप्टोकरेंसीज की शुरुआत की थी और इसका उद्देश्य इन सामान्य करेंसीज के साथ होने वाली मुश्किलों से बचना था।
इंटरनेट कनेक्शन रखने वाला कोई भी व्यक्ति एक अज्ञात एकाउंट के साथ इसमें ट्रांजैक्शन कर सकता है और इसका कंट्रोल एक प्राइवेट की के पास होता है। यूजर्स डिजिटल टोकन्स को कहीं भी भेज सकते हैं। इसके पीछे ब्लॉकचेन नाम का एक कंप्यूटर सिस्टम काम करता है।
बिटकॉइन की हाल के वर्षों में लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है लेकिन यह सामान्य करेंसी का कोई विकल्प नहीं बन सकता है। क्रिप्टोकरेंसीज में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव होता है और इनका इस्तेमाल सट्टेबाजी के लिए अधिक होता है।
इसके लिए इनकी वैल्यू को सामान्य करेंसीज से भी जोड़ा जा सकता है। क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए रेगुलेटर्स को भी आगे आना होगा। अमेरिका में इसके लिए पेमेंट ऐप्स और कॉइन जारी करने वालों को केवल बैंड डिपॉजिट में इनवेस्टमेंट करने के लिए कहा जा सकता है। इसके लिए फेडरल रिजर्व को कुछ रूल्स बनाने होंगे।
हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी में फ्रॉड और अन्य मुश्किलों से बचने के लिए इन्हें इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा देने की भी जरूरत होगी।