Adani Group News: अदाणी ग्रुप के खिलाफ बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने अपनी जांच क्यों रोक दी और फिर से शुरू कर दिया, इसका जल्द ही खुलासा होने वाला है। सेबी इसके बारे में जानकारी सुप्रीम कोर्ट में देगा। यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को सूत्रों के हवाले से मिली है। बता दें कि अदाणी ग्रुप के खिलाफ सेबी की जांच में देरी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सेबी पहली बार यह बताएगा कि कस्टम अधिकारियों ने 2014 में अदाणी ग्रुप के कंपनियों पर विदेशी पैसों की हेराफेरी को लेकर सचेत किया था लेकिन शुरूआती जांच में कुछ नहीं मिला तो जांच को 2017 में रोक दिया गया। इसके बाद फिर अदाणी ग्रुप के खिलाफ जब हिंडनबर्ग ने इस साल गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए तो सेबी ने फिर से जांच शुरू कर दी।
सुप्रीम कोर्ट कर रही जांच की निगरानी
सेबी इस समय अदाणी ग्रुप की जो जांच कर रहा है, सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी कर रहा है। अगस्त में सेबी ने जांच की जो स्टेटस रिपोर्ट पेश किया था, उसके मुताबिक यह लगभग पूरी हो चुकी है। हालांकि विदेशी पैसों और अनियमित खरीद-बिक्री के जरिए लिस्टेड कंपनियों से जुड़े नियमों के उल्लंघन की जांच अभी भी चल रही है और यह हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले से ही चल रही है।
Adani Group के खिलाफ कब से और कैसे-कैसे चली जांच
एक जनहित याचिकाकर्ता ने सितंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि 2014 में सूचना मिलने के बाद सेबी ने जांच की थी, इसकी जानकारी सेबी ने कभी नहीं दी थी और इस जांच के लिए समयसीमा की योजना के बारे में भी नहीं बताया। सेबी ने 2014 में कस्टम अधिकारियों की तरफ से मिले अलर्ट को भी छिपाए रखा था। इसमें आरोप लगाया गया था कि अदाणी ग्रुप की कंपनियों ने विदेशी पैसों के इस्तेमाल से शेयरों के भाव को मनमानी तरीके से सेट किया।
सूत्र के मुताबिक सेबी ने जनवरी 2014 में अलर्ट मिलने के बाद आरोपों की जांच शुरू की और 2017 तक जांच की। हालांकि सेबी को विदेशों से कोई भी आंकड़ा हासिल करने में सफलता नहीं मिल पाई।
इस मामले में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (DRI) ने भी जांच की थी। कोर्ट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक डीआरआई ने सेबी को जो जानकारी दी थी, उसमें आरोप लगाया था कि अदाणी ग्रुप की कंपनियों ने UAE से मंगाई गई चीजों के दाम बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए थे। जनवरी 2014 में DRI ने सेबी को भेजे गए पत्र में संदेह जताया था कि इस लेन-देन में इस्तेमाल हुए पैसे वापस अदाणी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में ही निवेश हुए थे।
हालांकि DRI के एडज्यूडिकेटर यानी फैसले लाने वाले अथॉरिटी ने 2017 में कस्टम डिपार्टमेंट के आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद सेबी की जांच ठंडे बस्ते में चली गई। DRI ने जांच बंद करने के एडज्यूडिकेटर के फैसले के खिलाफ अपील किया था लेकिन 2022 में ऊपरी अदालत ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि सबूत भरोसेमंद नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी मार्च 2023 में इस अपील को खारिज कर दिया और कहा कि उसे इस मामले में पड़ने की जरूरत नहीं है।