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Adani Power ने खास तरीके से कर्ज दिया Mundra Plant को, एसेट्स से ज्यादा तो देनदारियों का हो गया है बोझ

अदाणी ग्रुप (Adani Group) के ऊपर कर्जों को लेकर इस समय काफी चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में अगर बात करें तो इसकी पॉवर कंपनी Adani Power की तो इसका काफी बड़ा और कोयले से चलने वाला मुंदड़ा पॉवर प्लांट (Mundra Power Plant) भारी-भरकम कर्ज में डूबा हुआ है। इसके पास एसेट से ज्यादा देनदारियां हैं और 180 करोड़ डॉलर के घाटे में है। इस घाटे को लेकर कंपनी ने 100 करोड़ डॉलर से ज्यादा का क्रिएटिव डेट फाइनेंसिंग किया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 06, 2023 पर 10:15 AM
Adani Power ने खास तरीके से कर्ज दिया Mundra Plant को, एसेट्स से ज्यादा तो देनदारियों का हो गया है बोझ
Adani Power का काफी बड़ा और कोयले से चलने वाला मुंदड़ा पॉवर प्लांट (Mundra Power Plant) भारी-भरकम कर्ज में डूबा हुआ है।

अदाणी ग्रुप (Adani Group) के ऊपर कर्जों को लेकर इस समय काफी चर्चा हो रही है। इसी कड़ी में अगर बात करें तो इसकी पॉवर कंपनी Adani Power की तो इसका काफी बड़ा और कोयले से चलने वाला मुंदड़ा पॉवर प्लांट (Mundra Power Plant) भारी-भरकम कर्ज में डूबा हुआ है। इसके पास एसेट से ज्यादा देनदारियां हैं और 180 करोड़ डॉलर के घाटे में है। इस घाटे को लेकर कंपनी ने 100 करोड़ डॉलर से ज्यादा का क्रिएटिव डेट फाइनेंसिंग किया है। कंपनी ने निवेशकों को लेंडर्स को आश्वस्त किया है कि जल्द ही प्रॉफिट होने लगेगा। हालांकि अडाणी पॉवर के ऑडिटर इस दावे को लेकर कॉफिंडेंट नहीं दिखते हैं और न ही अकाउंटिंग एक्सपर्ट्स जिन्होंने ब्लूमबर्ग न्यूज से इस मसले पर बातचीत की।

कैसे दिक्कतों में आया मुंदड़ा का प्लांट

अदाणी ग्रुप के मालिक गौतम अदाणी (Gautam Adani) ने करीब 15 साल पहले पॉवर जेनेरेशन सेग्मेंट में एंट्री मारी। जल्द ही उन्होंने इतने प्लांट्स अपने कंट्रोल में कर लिए कि यह देश के सबसे बड़े सप्लॉयर्स में शुमार हो गया। इसकी फ्लैगशिप मुंदड़ा का पॉवर प्लांट गुजरात के तट पर स्थित है। पूरी क्षमता से चलने पर यह 50 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को बिजली सप्लाई कर सकता है। मुंदड़ा के लिए कोयले की सप्लाई इंडोनेशिया से होती थी और अदाणी ग्रुप की भी माइनिंग में हिस्सेदारी थी। यह पूरी कवायद लागत को कम करने के लिए थी।

हालांकि फिर जब वहां की सरकार से जुड़ी फ्यूल एक्सपोर्ट की कीमतें यूएस डॉलर में हुईं और रुपया कमजोर होने लगा तो अदाणी की यह योजना फेल हो गई। बढ़ती लागत से निपटने के लिए अडाणी पॉवर ने स्थानीय इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूटर्स से फिर से सौदा करने की कोशिश की लेकिन फेल रही। इसके बाद यह विवाद कोर्ट में चला गया। इस पूरे समय में मुंदड़ा का प्लांट चलता रहा लेकिन यह पैसे भी जलाती रही। 2019 में सेंट्रल पॉवर रेगुलेटर ने गुजरात में बिजली की कीमतें बढ़ाने की इजाजत तो दी लेकिन उसके बाद पिछले तीन वित्त वर्षों में यह लगातार पैसे खाती रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी यह अपनी कैपेसिटी से कम में चल रही है।

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