Best Investment Tips: सबसे पहले कहां पैसे लगाएं? Nithin Kamath ने दिया गरीबी को भगाने वाला टिप्स

Best Investment Tips: निवेश को लेकर पहली समस्या ये आती है कि सबसे पहले पैसे कहां लगाएं। इसे लेकर घरेलू ब्रोकेरज फर्म जीरोधा (Zerodha) के फाउंडर नितिन कामत (Nitin Kamath) ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। नितिन ने सुझाव दिया है कि अपनी खुद की फाइनेंस जर्नी शुरू करने से भी पहले इस विकल्प में निवेश करना चाहिए। जानिए क्या है यह विकल्प जिससे आप भविष्य की भारी दिक्कत से बच सकते हैं

अपडेटेड Mar 31, 2023 पर 6:03 PM
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Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत (Nitin Kamath) के मुताबिक सबसे लेटेस्ट डेटा फिलहाल वर्ष 2014 का उपलब्ध है। इसके मुताबिक शहरों में हॉस्पिटलाइजेशन पर औसतन खर्च 26475 रुपये और गांवों में 16676 रुपये है।

Best Investment Tips: जब आप निवेश शुरू करते हैं तो इसे लेकर सबसे पहले समस्या ये आती है कि पैसे कहां लगाए जाएं। इसमें भी सबसे पहले कहां निवेश किया जाए, इसे लेकर बहुत उलझन होती है। इसे लेकर घरेलू ब्रोकेरज फर्म जीरोधा (Zerodha) के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत (Nitin Kamath) ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। नितिन ने सुझाव दिया है कि अपनी खुद की फाइनेंस जर्नी शुरू करने से भी पहले इस विकल्प में निवेश करना चाहिए। नितिन के मुताबिक परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय निवेश है। जीरोधा के सीईओ का मानना है कि कहीं और किसी भी विकल्प में निवेश के पहले जितना आप अफोर्ड कर सकते हैं, उतना हेल्थ कवर ले लें, मौजूदा दौर को देखते हुए यह सबसे जरूरी है।

स्वास्थ्य पर खर्चों के चलते करोड़ों लोगों को पैसे की किल्लत

नितिन कामत के मुताबिक सबसे लेटेस्ट डेटा फिलहाल वर्ष 2014 का उपलब्ध है। इसके मुताबिक शहरों में हॉस्पिटलाइजेशन पर औसतन खर्च 26475 रुपये और गांवों में 16676 रुपये है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर साल 6.3 करोड़ से अधिक भारतीयों को पैसे की किल्लत हो रही है। जीरोधा के सीईओ ने आगे कहा कि हेल्थकेयर कॉस्ट्स लगातार बढ़ती रहेगी और इससे निपटने का बस एक ही तरीका है कि सभी भारतीयों को हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर जागरुक किया जाए।


 

हॉस्पिटल खर्च के चलते 8-9 फीसदी परिवार आए गरीबी में

जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने इंडिया स्पेंड का एक ऑर्टिकल भी शेयर किया जो परेशान करने वाला है। इसके मुताबिक बीमा योजनाएं नहीं होने के चलते भारतीय परिवार स्वास्थ्य से जुड़े खर्च खुद वहन करते हैं। स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के दिए गए आंकड़ों से लग सकता है। इस आंकड़े के मुताबिक अस्पताल से जुड़े खर्चों के चलते करीब 8-9 फीसदी भारतीय परिवार गरीबी रेखा के नीचे लुढ़क गए।

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